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दही-हांडी पर सियासत गर्म


दही-हांडी पर सियासत गर्म
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इस साल दही-हांडी को लेकर जो सियासत गरमाई है राजनेता इसकी आग कम नहीं होने देंगे I जरूरत पड़ेगी तो वो इसमें घी की तरह ‘हिन्दुत्व’ और ‘मराठी मानूस’ जैसे मुद्दों की आहूती देने से भी नहीं चूकेंगे। पर हरेक पार्टी इस मुद्दे को बीएमसी के चुनाव तक ले जाना चाहेगी। न्यायालय ने 20 फुट से अधिक ऊंचाई की मानव पिरामिड पर रोक का निर्णय सुनाया जिसे उच्च न्यायालय ने जारी रखा। पर यह निर्णय कुछ पार्टियों के गले नहीं उतरा या यूं कहें गले उतारना नहीं चाहा। अब क्या था न्यायालय की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाए जाने लगे। इस कड़ी में मनसे प्रमुख राज ठाकरे सबसे अव्वल रहे उन्होंने न्यायालय की अवमानना करने में जरा भी देर नहीं लगाई। कुछ पार्टियां व नेता ऐसे भी हैं जो इस पर चुप्पी साधे रहे। यहां पर यह कहना गलत नहीं होगा कि न्यायालय ने राजनैतिक पार्टियों को बीएमसी चुनाव के लिए एक मुद्दा दे दिया। जिसे राजनैतिक पार्टियां अपनी जरूरत के हिसाब से मुद्दे को सजाकर जनता के सामने परोसेंगी।

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