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कोर्ट ने BJP की मांग को किया खारिज, BMC में कांग्रेस का ही रहेगा विपक्ष का नेता

इसे भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि BMC में शिव सेना के बाद सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ही है, लेकिन बीजेपी की हालत ऐसी है न माया मिली न राम।

कोर्ट ने BJP की मांग को किया खारिज, BMC में कांग्रेस का ही रहेगा विपक्ष का नेता
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शिवसेना (shivsena) के साथ गठबंधन टूटने के बाद, बीजेपी ने संख्याबल के आधार पर मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC)में मुख्य विपक्षी दल का दावा किया था।  हालांकि, मुंबई उच्च न्यायालय (high court) ने भाजपा (BJP) के इस दावे को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि कांग्रेस (Congress) ही मुख्य विपक्ष दल बनी रहेगी। इसे भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि BMC में शिव सेना के बाद सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ही है, लेकिन बीजेपी की हालत ऐसी है न माया मिली न राम।

2017 में हुए बीएमसी चुनाव (BMC election) में शिव सेना और BJP ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में शिवसेना को बहुमत हासिल हुआ था, जिसके बाद BJP ने निर्णय किया था कि वह शिवसेना को बाहर से समर्थन देगी।

इतना ही नहीं उस समय, चूंकि राज्य में शिवसेना-भाजपा गठबंधन (shivsena-BJP alliance) की सरकार थी तो भाजपा ने विपक्ष में नहीं बैठने का फैसला किया। इसलिए, नियमानुसार तीसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस में से विरोधी पक्ष नेता को चुन लिया गया।

इसके बाद जब साल 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट गया और शिवसेना ने राज्य में राकांपा (NCP) और कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन कर सरकार बना लिया तो भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। 

इसके बाद भाजपा ने BMC में भी विपक्ष में बैठने का दावा किया और BJP से ही विपक्षी दल चुने जाने की मांग की।

लेकिन BJP की इस मांग को लेकर मेयर किशोरी पेडनेकर (Mayor kishori pednekar) ने स्पष्ट किया कि चूंकि नेता प्रतिपक्ष का पद एक संवैधानिक पद है, इसलिए केवल BJP की मांग पर इसे कांग्रेस से हटा कर भाजपा को नहीं दिया जा सकता।

इसके बाद भाजपा ने मुंबई उच्च न्यायालय का रुख किया। BJP ने अपनी याचिका में कहा कि, चूंकि BMC में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए भाजपा में से बिपक्षी दल का नेता चुना जाना चाहिए।

लेकिन कोर्ट ने भी BJP के खिलाफ फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति एस.जे. काथावला और माधव जामदार की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा, महापौर ने कांग्रेस के रवि राजा को विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्त किए जाने का अपने अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने कानून के दायरे में रहकर ही यह फैसला किया है।

पीठ ने कहा, साल 2017 में, बीजेपी ने इस पद को अस्वीकार कर दिया था। किसी व्यक्ति या पार्टी के पक्ष के अनुसार विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद को बदलना कानून सम्मत नहीं है।  इसलिए कांग्रेस के रवि राजा (ravi raja) विपक्ष का नेतृत्व बरकरार रखेंगे।

गौरतलब है कि, वर्तमान में, BMC की 227 सीटों में से शिवसेना के पास 92 सीटें, भाजपा के पास 82 और कांग्रेस के पास 30 सीटें हैं।

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