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सावधान, अब गृह मंत्री भी टार्गेट देते हैं


सावधान, अब गृह मंत्री भी टार्गेट देते हैं
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लोकतंत्र के नए-नए रंग हर दिन देखने को मिलते हैं। राज्य की महाविकास आघाडी सरकार के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने यह आरोप लगाया कि है वे उन्हें हर माह 100 करोड़ रुपए का डार्गेट देते थे। अब तक डार्गेट कंपनियों, आफिसों, किसी विकास का कार्य के लिए दिए जाते थे, लेकिन वर्तमान सरकार के गृहमंत्री हैं, जो कि मुंबई के पुलिस विभाग पर हर माह 100 करोड़ जमाने का दबाब डालते थे। किसी राज्य के गृहमंत्री पर आयुक्त पद के किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से इस तरह का आरोप लगाया जाना, अपने आप में बहुत बड़ी बात है। गृहमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी रांकापा सुप्रिमो शरद पवार का यह कहना कि अनिल देशमुख के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। पवार के इस बयान पर सभी को हैरानी हो रही है।



अपनी पार्टी के नेता पर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए राकांपा सुप्रिमो शरद पवार जिस तरह की सुरक्षा दीवार बनकर खड़े हुए हैं, उससे लोगों के बीच यही संदेश गया है कि शरद पवार भी अपनों को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने में गुरेज नहीं करते। तीन दलों की सरकार में शिवसेना की ओर से शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को भले ही सरकार का मुखिया बनाया गया हो, लेकिन अंतिम फैसला राकांपा सुप्रिमो शरद पवार का ही होगा। पिछले दिनों सामाजिक न्याय मंत्री तथा राकांपा के दिग्गज नेता धनंजय मुंडे पर   बलात्कार का आरोप लगा था। विपक्ष ने धनंजय मुंडे का इस्तीफा मांगा था, लेकिन उस वक्त भी राकांपा सुप्रिमो शरद पवार ने मुंडे के इस्तीफे को गंभीरता से नहीं लिया था। दूसरी ओर जब शिवसेना विधायक जो सरकार में वन मंत्री थे, पर इसी तरह का आरोप लगा तो उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य किया गया। एक ही तरह के आरोप में एक मंत्री से इस्तीफा मांगा गया तो एक को अभयदान दिया गया। राकांपा के दो मंत्रियों अभयदान और शिवसेना के एक मंत्री को पद से हटाने यह लोगों के बीच यह संदेश गया है कि एक सरकार दो विधान।



शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री होते हुए भी अपनी पार्टी के नेता को मंत्रिमंडल में रखवा पाने में सफल नहीं हो पाए और वन मंत्री संजय राठौड को इस्तीफा देना पड़ा। परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जो खुलासा किया है, उससे महाराष्ट्र की राजनीति उखल-पुथल मच गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से परमबीर सिंह की ओर से भेजे गए पत्र के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पत्र में लिखी गई बातों पर सवाल उठाए गए हैं। परमबीर सिंह के नाम से मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकृत ई-मेल पर प्राप्त हुए उक्त पत्र में किसी के भी हस्ताक्षर नहीं हैं। पत्र में परमबीर सिंह का नाम तो है लेकिन हस्ताक्षर नहीं है, इसलिए परमबीर सिंह के इस पत्र के बारे में शंका व्यक्त की जा रही है।

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