महाराष्ट्र में जीएसटी बिल हुआ पास, जानें क्या प्रभाव होगा आप पर

 Nariman Point
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महाराष्ट्र विधानसभा में आखिरकार जीएसटी के तीनों बिल सर्वसम्मति से पास हो ही गए। अधिवेशन के दुसरे दिन यानी सोमवार को जीएसटी विधेयक क्रमांक 33 भी पास हो गया। इसके पहले विधेयक 34 और 35 को अधिवेशन के पहले दिन ही पास कर दिया गया था।
बता दें कि वित्तमंत्री मुनगंटीवार ने राज्य जीएसटी से संबंधित तीन अलग-अलग विधेयक विधानसभा में रखे। पहला विधेयक मूल राज्य जीएसटी विधेयक, दूसरा महानगरपालिका को मिलने वाला मुआवजा और तीसरा जीएसटी लागू करने से पहले पुराने कानून को रद्द करने से संबंधित था। इसमें से दूसरे और तीसरे विधेयक को विधानसभा ने एकमत से मंजूरी दे दी। महानगरपालिका के मुआवजे का विधेयक विधान परिषद ने भी लंबी चर्चा के बाद मंजूर कर लिया।

वित्त मंत्री ने कहा कि देशभर में 1 जुलाई से जीएसटी लागू हो जाएगा। इससे पहले मुंबई महानगरपालिका समेत राज्य की 27 महानगरपालिका की आय के मुख्य जरिया एलबीटी और ऑक्ट्राय खत्म हो जाएंगे। इसकी भरपाई केंद्र सरकार अगले 5 साल तक करेगी। केंद्र सरकार महाराष्ट्र को औसतन 14 प्रतिशत हर साल वृद्धि की दर से भुगतान करेगा। उस रकम में से राज्य सरकार महानगरपालिका को हर साल 8 प्रतिशत वृद्धि की दर से भुगतान करती रहेगी। महानगरपालिका को यह रकम तय समय पर हर महीने मिलेगी।अब इस तीनों बिलों को विधान परिषद में मंजूरी मिलने के बाद 1 जुलाई से राज्य भर में जीएसटी लागू हो जाएगा.

वस्तु और सेवा कर की विशेषताएं

  • इस कर प्रणाली के अनुसार करों पर कर (उपकार या सेस) नहीं लगेगा जिससे सामान सस्ते होंगे।
  • केंद्र और राज्य शासन द्वारा लगाए गये अनेक कर समाप्त होकर एक कर हो जाएंगे जिससे कर देने में सुविधा होगी।
  • व्यापारी और उद्योगपतियों को भी हिसाब किताब में आसानी होगी।
  • पूरे भारत में एक कर प्रणाली होने से एक मार्केट एक टैक्स होगा जिससे सारी वस्तुओं के दाम हर जगह एक ही होंगे।
  • कर रचना पारदर्शक होगी। कंप्यूटर के माध्यम से व्यापारियों को सुविधा होगी।
  • वस्तु और सेवा कर नियम से केंद्र और राज्य द्वारा लागू कुल 17 करों को एक ही करों में सम्मिलित कर दिया गया है, जिसमें चुंगी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), राज्य स्तर के सेल्स टैक्स या वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैंप ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फी, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या बिक्री पर लगने वाले टैक्स, सामान के ट्रांसपोटेर्शन पर लगने वाले टैक्स इत्यादि खत्म हो जाएंगे।
  • जीएसटी को केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (CGST), राज्य वस्तु और सेवा कर (SGST), अन्तर्राजिय वस्तु और सेवा कर (IGST) और संघ राज्य वस्तु और सेवा कर (UTGST) इस तरह से चार भागों में बांटा गया है।

वस्तु और सेवा कर के 9 नियमों को परिषद ने मंजूरी दी जिसमें रजिस्ट्रेशन का नियम, विवरण का नियम, कर भरने का नियम, मूल्यांकन नियम, चालान नियम, इनपुट कर क्रेडिट (ITC) के नियम, संरचना योजना नियम, संक्रमणकालीन नियमों का समावेश है। इस कर में एक कर ढांचे का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार 1.50 करोड़ रुपए का टर्नओवर करने वाले 90 फीसदी व्यापारी राज्य प्रशासन के पास रहेंगे और उससे ऊपर के टर्नओवर वाले व्यापारी केंद्र सरकार के पास रहेंगे।


50 हजार या उससे अधिक कीमत के सामानों को ढोने के लिए ई-वे बिल आवश्यक है। शासकीय विभाग, स्थानीय संस्था के साथ शासकीय संस्थाओं को 2.5 लाख से अधिक की भुगतान की रकम में 1 फीसदी टीडीएस का प्रावधान है। ऐसे संस्थाओं को अपना विवरण पत्र दाखिल करना आवश्यक होगा। यही नहीं देरी से भुगतान करने पर ब्याज भी वसूला जायेगा।

महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर कानून लागू करने के लिए राज्य ने जो तैयारी की है वह इस प्रकार है-

  • राज्यों के उद्योग व्यापारियों के लिए अधिकारीयों के लिए और सेवा कर संबंधी अधिक जानकारी देने के लिए स्वतंत्र कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
  • अब तक 5100 अधिकारी कर्मचारी को जीएसटी कानून का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें 17 मुख्य प्रशिक्षक और 100 प्रशिक्षक शामिल हैं।
    175 अधिकारियों ने जीएसटीएन के मुख्य प्रशिक्षक के तौर पर प्रशिक्षण दिया।
  • 6000 राज्य अधिकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण अभी जारी है।
  • महाराष्ट्र जीएसटी के बाबत अब तक 240 जनजागृति कार्यक्रम और मुंबई में 33 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है।


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