राज की शांति का क्या है 'राज'..? सुनिए राज की जुबानी

दादर - बाघ के समान आक्रामक छवि वाले मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे इन दिनों शांत नजर आ रहे हैं। राज की इस शांति का 'राज' क्या है? खुद राज ठाकरे ने इस 'राज' को मुंबई लाइव के खास कार्यक्रम 'उंगली उठाओ' में खोला है। राज ने बताया कि इस गरुड झेप यानि शांति के पीछे उनका मिशन 2019 है, जिसमें मनसे सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। उन्होंने कहा कि गरुड की तरह उड़ान भरते हुए मनसे 2019 के मिशन में जीत हासिल करेगी और सभी पार्टियों को पीछे छोड़ देगी।

राज ने बीजेपी पर पैसाखोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा पैसे की थैली लेकर लोगों के घर गई और पैसे के लिए लोग बीजेपी के साथ जुड़े। राज ने कहा कि जब कांग्रेस की पांच दशकों की राजनीति अचानक चौपट हो गई तो मनसे को तो अभी 10 साल ही हुए हैं। 2014 से पहले भाजपा कहां थी? उसे तो नरेंद्र मोदी ने ऊपर उठाया। प्रत्येक पार्टी में उतार चढ़ाव लगा रहता है, ऐसा ही मनसे के साथ भी हो रहा है।

राज ठाकरे ने नोटबंदी के मुद्दे पर भी बीजेपी को जमकर खरी खोटी सुनाई। राज ने नासिक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर मनपा में मनसे की सत्ता में जो विकास कार्य हुए हैं वो दिख रहा है, जनता खुद उसे स्वीकार कर रही है। लेकिन बीजेपी के लोग काम के बजाय विज्ञापन में पैसे खर्च करके क्या दिखाना चाहते हैं। राज ने राज्य के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का फोटो भाजपा के विज्ञापनों में नजर आ रहा है। हकीकत में तो उन्हें मोदीजी ने कुर्सी पर बैठाया है। कल मोदीजी का मन करेगा तो उन्हें हटाकर दूसरे को सीएम बना देंगे।

राज ने शिवसेना को भी नहीं बख्शा, राज ने कहा कि शिवसेना में हिम्मत नहीं हैं कि वो सत्ता से बाहर निकल जाए। अगर सत्ता से बाहर निकलना है तो फिर 23 तारीख का मुहूर्त कैसा? दोनों पार्टियों ने 25 साल तक कुछ नहीं किया, इसलिए लोगों को ध्यान हटाने के लिए दोनों यह सब कर रही हैं। अमित ठाकरे के राजनीति में उतरने की बात पर उन्होंने कहा कि अमित की जो इच्छा होगी उसका फैसला वहीं लेंगे। राजनीति में उतरने का फैसला लेने के लिए वो स्वतंत्र हैं।

 

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