कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन कर शिव सेना ने पहना है कांटों भरा ताज?

सरकार गठन से पहले ही जब से शिव सेना ने अलग विचारधारा वाली पार्टियों कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार गठन करने की घोषणा की थी तभी से ही अटकलों का दौर चालू हो गया था कि यह सरकार अधिक दिनों तक नहीं चलेगी।

कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन कर शिव सेना ने पहना है कांटों भरा ताज?
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महाराष्ट्र (maharashtra) की महाविकास आघाड़ी (mah avikas aghadi) सरकार में शामिल तीनों पार्टियाँ शिव सेना (shiv sena), कांग्रेस (congress) और एनसीपी (NCP) मिलकर सरकारक चला रही हैं। सरकार गठन से पहले ही जब से शिव सेना ने अलग विचारधारा वाली पार्टियों कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार गठन करने की घोषणा की थी तभी से ही अटकलों का दौर चालू हो गया था कि यह सरकार अधिक दिनों तक नहीं चलेगी। ऐसे कई मुद्दे आए जिन पर कांग्रेस और एनसीपी के साथ शिव सेना का मतभेद खुल कर सामने आया।  

शिव सेना की पूर्व सहयोगी पार्टी बीजेपी (BJP) ने कई बार शिव सेना पर यह आरोप लगाया है कि वह सत्ता की मजबूरी में बुरी तरह जकड़ी हुई है। बीजेपी ने हिंदुत्व(hindutva), वीर सावरकर(veer sawarkar), CAA सहित अन्य मुद्दों पर शिव सेना को घेरा, मजबूर शिव सेना के बयानों से कांग्रेस और एनसीपी को परेशानी भी हुई, लेकिन कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की बात कह कर सत्ता पक्ष के नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।  

ताजा मामला अभी हाल का है जब बीजेपी ने वीर सावरकर की पुण्य तिथि पर बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा में सावरकर गौरव प्रस्ताव पेश कर शिवसेना को पशोपेश में डालने का प्रयास किया लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले (nana patole) ने इसे खारिज कर शिव सेना को बचा लिया।

कांग्रेस कई बात सावरकर के खिलाफ बयान दे चुकी है, जबकि शिव सेना कई बात सावरकर को हिंदुत्व का मुखौटा बता चुकी है। तो ऐसे में दोनों के बीच मतभेद तो होना ही था।

लेकिन शिवसेना का सावरकर के प्रति रुख बदल जाना सचमुच आश्चर्यजनक लगता है, साफ़ जाहिर होता है कि शिव सेना सावरकर के विरोध करने वाले सहयोगी दलों को नाराज करना नहीं चाहती।

पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने शिव सेना पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के लिए शिवसेना इतनी लाचार हो जाएगी इसकी कल्पना नहीं थी यह बाल ठाकरे (bal thackeray) की शिवसेना नहीं है मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए वीर सावरकर को भुला दिया जबकि सावरकर के अपमान के लिए बाल ठाकरे ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर को जूते मारने की बात कही थी।

हालांकि उपमुख्यमंत्री एनसीपी नेता अजित पवार (ajit pawar) ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा, 5 साल तक सरकार में रहने के बाद बेजीपी ने गौरव प्रस्ताव नहीं लाया। साथ ही पवार ने यह भी कहा, वीर सावरकर को भारत रत्न देने की सिफारिश की गई लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने अभी तक इस बारे में निर्णय नहीं लिया है संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब ने कहा कि भारत सरकार पहले वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित करें इसके बाद महाराष्ट्र सरकार विधानसभा में सावरकर और प्रधानमंत्री मोदी दोनों के अभिनंदन का प्रस्ताव लाएगी।

यही नहीं इसके पहले भी शिव सेना ने CAA को समर्थन देने की बात कह कर कांग्रेस और एनसीपी को परेशान किया था. वैसे महाराष्ट्र की जनता यही चाहेगी कि यह सरकार अच्छी तरफ से अपना कार्यकाल पूरा करे, उसे फिर से चुनाव के मुहाने न जाना पड़े।

वैसे इन तीनों पार्टियों में कांटों भरा ताज किसने पहना है यह कहना मुश्किल है?

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