महाराष्ट्र: 'वंचित' ने किया कांग्रेस और एनसीपी को जीत से वंचित

हालांकि इस गठबंधन ने एक सीट ही जीती लेकिन हर सीट पर वह दुसरे या तीसरे नंबर पर रही। इस पार्टी को दलित और मुस्लिमो ने काफी वोट दिया जो कि कांग्रेस के थे।

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लोकसभा चुनाव में देश भर में कांग्रेस की जो दुर्गति हुई है उससे महाराष्ट्र कांग्रेस भी अछूती नहीं रही। अगर महाराष्ट्र के चुनावी आंकड़ों पर नजर डाले तो कांग्रेस को जितना नुकसान वंचित बहुजन अगाणी (VBA) ने पहुंचाई उतना किसी ने नहीं। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के पोते और दलित नेता प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन) के साथ गठबंधन किया था। हालांकि इस गठबंधन ने एक सीट ही जीती लेकिन हर सीट पर वह दुसरे या तीसरे नंबर पर रही। इस पार्टी को दलित और मुस्लिमो ने काफी वोट दिया जो कि कांग्रेस के थे।

मोदी लहर में खुद प्रकाश आंबेडकर सोलापुर से हार गये हो लेकिन नतीजे देख कर वे खुश जरुर हुए होंगे। पार्टी को एक तरह से मनोवैज्ञानिक जीत जरुर मिला होगा और उनका आत्मविस्वास भी बढ़ा होगा। कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन ने 14 सीटें मोदी लहर से अधिक वंचित बहुजन आघाड़ी के कारण गंवाई। क्योंकि राज्यभर में करीब 14 सीटें ऐसी हैं, जहां वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदावर को 50 हजार से डेढ़ लाख वोट मिले हैं और ये सारे वोट कांग्रेस-एनसीपी के ही थे जिससे उनकी तमाम संभावनाओं पर पानी फिर गया।

बड़े नेताओं के हार में ही वंचित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व मुख्यमंत्री और देशाध्यक्ष अशोक चव्हाण खुद हार गये। उन्हें बीजेपी के प्रताप पाटिल चिखलीकर ने हराया। इस सीट से वंचित के उम्मीदवार यशपाल भिंगे को एक लाख से अधिक वोट मिले थे, दलित और मुस्लिम वोटों का बंटवारा ही चव्हाण को ले डूबा।

यही नहीं सोलापुर से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशीलकुमार शिंदे चुनाव हार गए। उन्हें भाजपा के जयसिद्धेश्वर महाराज ने हरा दिया। यहां भी प्रकाश आंबेडकर ने शिंदे को हराने में योगदान दिया।

मुंबई के नॉर्थ  सेंट्रल से चुनाव लड़ रहे VBA के उम्मीदवार एआर अंजारिया खुद चुनाव हार गये लेकिन अपने प्रदर्शन से वे खुश हैं। उनका कहना है कि, VBA के प्रदर्शन से हमें मजबूत हुए हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे।' अंजारिया का मुकाबला प्रिया दत्त और पूनम महाजन जैसे कद्दावर नेताओं से था।

आपको बता दें कि महागठबंधन में कांग्रेस-एनसीपी वंचित को भी शामिल करना चाहती थी लेकिन सीट बंटवारे मुद्दे पर सहमती नहीं बन पाने के कारण वंचित ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। प्रकाश आंबेडकर के भारिप-बहुजन महासंघ और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को मिलाकर महाराष्ट्र में वंचित बहुजन आघाड़ी बनाई थी। कांग्रेस एनसीपी के इस फैसले ने कांग्रेस और एनसीपी की लुटिया डूबो दी।

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