महाराष्ट्र में फेल हो गई अमित शाह की रणनिती!

महाराष्ट्र में सरकार स्थापित करने के लिए कभी एक साथ रहनेवाले बीजेपी और शिवसेना आमने सामने खड़े हो गए।

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के 35 दिनों के बाद दूसरे मुख्यमंत्री ने शपथ ली है। उद्धव ठाकरे के पहले बीजेपी के देवेंद्र फड़णवीस ने 23 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, इसके साथ ही एनसीपी के अजित पवार ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकी देवेंद्र फड़णवीस के शपथ लेने के विरोध में शिवसेना , कांग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र फड़णवीस को 27 नवंबर को बहुंमत सिद्ध करने के लिए कहा। लेकिन बहुमत सिद्ध करने के पहले ही देवेंद्र फड़णवीस और अजित पवार ने अपने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।  

कहा जा रहा है की भले ही सत्ता स्थापना की कोशिश मुंबई में हो रही थी लेकिन दिल्ली में बैठे बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह सकी पूरी देखरेख कर रहे थे।  राज्य में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने मिशन लोटस की भी शुरुआत की।  बीजेपी ने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी नारायण राणे, राधाकृष्ण विखे पाटिल जैसे नेताओं को दी जो दूसरी पार्टियों को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।  हालांकी एनसीपी के अजित पवार ने जब उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तो यह बात साफ हो गई की बीजेपी का मिशन लोटस प्लान भी फेल हो गया है।  

महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार बनाने में जिस शख्स का सबसे अहल रोल है वह है एनसीप प्रमुख शरद पवार। शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनिती का चाणक्य भी काहा जाता है।  एनसीपी नेता अजित पवार के देवेंद्र फड़णवीस को समर्थन करने के बाद शरद पवार ने ही एनसीपी को बगावती विधायको को फिर से अपने पाले में शामिल कर लिया। जिसके बाद एक बार फिर से देवेंद्र फड़णवीस को इस्तीफा देना पड़ा। बीजेपी की  सरकार बनाने की पूरी कवायद को  अमित शाह मॉनिटर कर रहे थे तो वही दूसरी ओर एनसीपी के शरद पवार फिर से अपने विधायको को पार्टी में वापस लाने का काम संभाल रहे थे। अमित शाह और शरद पवार की इस जंग में शरद पवार आगे निकल गए। उन्होने एनसीपी के सभी विधायको को अजित पवार खेमे से फिर से अपने खेमे में शामिल कर दिया जिससे बीजेपी के चाणक्य कहे जानेवाले अमित शाह को एक बार फिर हार का मुह देखना पड़ा।

शाह और शरद पवार में पुरानी सियासी टक्‍कर रही है। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के सामने मात खाने के बाद शरद पवार ने महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने पश्चिमी महाराष्‍ट्र में बहुत अच्‍छी वापसी की। दरअसल साल 2014 में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही बीजेपी ने महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ एनसीपी पर भी निशाना साधाना शुरु कर दिया था। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को पता था की कांग्रेस को भले ही 70 साल के कामों के नाम पर मात दी जा सकती है लेकिन शरद पवार के एनसीपी को हराना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होगी। मोदी और शाह ने शुरु से ही शरद पवार पर निशाना साधना शुरु कर दिया था।

मोदी ने शरद पवार को बताया अपना गुरु

महाराष्ट्र में हुई इस राजनिती कवायद में एक बात यह भी निकलकर आई की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहते थे की बीजेपी अजित पवार की मदद से सरकार बनाए , लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर देवेंद्र फड़णवीस ने अजित पवार के विधायको के समर्थन वाली चिठ्ठी राज्यपाल को देकर अपनी सरकार बनवा ली। हालांकी 80 घंटों के अंदर ही देवेंद्र फड़णवीस को एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। पीएम मोदी ने साल 2016 में एक कार्यक्रम में कहा था कि उन्‍हें इस बात को स्वीकारने में कोई हिचक नहीं है कि उन्‍होंने पवार को हाथ पकड़कर राजनीति के गुर सीखे हैं।

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