
महायुति सरकार पर निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी का परिणाम है कि आज महाराष्ट्र निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एन.सी. ने मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उबाठा पर तीखा हमला करते हुए बताया कि महायुति सरकार के मजबूत नेतृत्व के कारण महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है।
14.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश समझौता
शायना एन.सी. ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF), डावोस के उद्घाटन के पहले ही दिन १४.५ लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश समझौता (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह एक ही दिन में हासिल की गई निवेश राशि लगभग २०२५ के पूरे डावोस शिखर सम्मेलन में जुटाए गए कुल निवेश के बराबर है। कुल १९ MoUs पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
लगभग 11 लाख करोड़ रुपये के MoUs पर हस्ताक्षर
उन्होंने आगे कहा कि एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में चलने वाली एमएमआरडीए (MMRDA) ने लगभग ११ लाख करोड़ रुपये के MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विकास को किस गति से आगे बढ़ाया जा रहा है और उसी भरोसे के आधार पर निवेशक महाराष्ट्र में निवेश कर रहे हैं।शायना एन.सी. ने बताया कि महाराष्ट्र में कई बड़ी कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, जिनमें SBG ग्रुप, अल्टा कैपिटल, पंचशील रियलिटी, कार्ल्सबर्ग ग्रुप जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना
उबाठा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि डावोस में लोग पिकनिक मनाने गए हैं। उन्हें पिकनिक ही नजर आती है, क्योंकि वे खुद विदेशों में जाकर केवल पिकनिक मनाते रहे हैं। इसके विपरीत, महायुति सरकार महाराष्ट्र में निवेश लाकर लोगों को रोजगार दे रही है और राज्य के विकास को गति दे रही है।
शायना एन.सी. ने उबाठा के नेताओं को याद दिलाते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में महाराष्ट्र निवेश के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। उस समय निवेशकों का उन पर भरोसा नहीं था और उनके पूरे कार्यकाल में महाराष्ट्र को केवल २७,१४३ करोड़ रुपये का ही निवेश मिला था।
निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से २०२० में ‘मैग्नेटिक महाराष्ट्र’ पहल शुरू की गई थी, जिसका मकसद प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल अनुमतियों के जरिए निवेशकों को आकर्षित करना था, लेकिन यह योजना पूरी तरह विफल साबित हुई। दिसंबर २०२० में उद्धव ठाकरे सरकार ने ६१,००० करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों वाले २५ नए MoUs पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन वास्तविकता में एक भी MoU लागू नहीं हुआ। ये सभी समझौते केवल कागजों तक ही सीमित रह गए।
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