जीत से गदगद विपक्ष ने EVM पर नहीं उठाए सवाल

पिछले कुछ वक्त से हर चुनाव के बाद ईवीएम को लेकर राजनीतिक पार्टियों की ओर से बयान जरूर आते थे लेकिन इस बार आरोप लगाने वाली पार्टियां चुप हैं, उन्हें EVM से अब कोई शिकायत नहीं है।

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कहते हैं समय से बड़ा कुछ नहीं होता, जब सब कुछ अपने पक्ष में होता है तो सब अच्छा लगता है लेकिन चीजें खिलाफ जाने पर इंसान को कुछ नहीं सूझता। हम बात कर रहे हैं EVM की। जब कोई पार्टी चुनाव हारती है तो सारा दोष सत्ता पक्ष पर मढ़ कर EVM को हैक करने का आरोप लगाती है, लेकिन वही आरोप लगाने वाली पार्टी जान चुनाव जीत जाती है तो EVM के खिलाफ कुछ नहीं बोलती। इसी चुनाव में यह देखने को मिला। पिछले कुछ वक्त से हर चुनाव के बाद ईवीएम को लेकर राजनीतिक पार्टियों की ओर से बयान जरूर आते थे लेकिन इस बार आरोप लगाने वाली पार्टियां चुप हैं, उन्हें EVM से अब कोई शिकायत नहीं है।

इस चुनाव में महाराष्ट्र में NCP को संजीवनी मिली है जबकि कांग्रेस भी बिना कोई मेहनत किए जीत गयी जबकि हरियाणा में कांग्रेस अच्छी पोजीशन में है। इतनी अच्छी पोजीशन में कि वह सरकार बनाने के लिए प्रयासरत है। अच्छी बात यह है कि अब तक कहीं से भी EVM हैक होने की बात नहीं उठी है न तो हरियाणा से और न ही महाराष्ट्र से।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग तमाम तरह के आरोप लगा रहे थे वे कर्नाटक, एमपी और राजस्थान में नतीजों के बाद भी चुप ही थे।हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों ने भी साबित कर दिया है कि ईवीएम को टैंपर करने की बात पूरी तरह से गलत है।'

हालांकि इस बार भी चुनाव में  ईवीएम का मुद्दा छाया रहा। मुंबई से सटे ठाणे में तो वोटिंग वाले दिन सुनील खाम्बा नामके व्यक्ति ने तो वोट डेट समय EVM पर स्याही फेंक कर EVM के खिलाफ बूथ पर ही नारा लगाने लगा। इसके बाद इसे गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बाद में इन महाशय को जमानत मिल गयी। बताया गया कि सुनील खाम्बे किसी रिपब्लिक पार्टी का सदस्य है।

इसके पहले भी चुनाव आयोग ने कई बार सभी पार्टियों को खुले आम EVM हैक कर दिखाने  की चुनौती दी थी, जिस पर कोई पार्टी सामने नहीं आई।
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