500 करोड़ जमीन घोटाले को लेकर बीएमसी कमिश्नर पर हो कार्रवाई- संजय निरुपम


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मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने बीएमसी कमिश्नर अजोय मेहता के खिलाफ 500 करोड़ लैंड ग्रैबिंग का सनसनीखेज आरोप लगाया। यह जमीन जोगेश्वरी में स्थित है। इस मामले में निरुपम ने मंगलवार को पुलिस उपायुक्त अभिषेक त्रिमुखे से मुलाकात की और मेहता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बाबत पत्र सौंपा।

दुर्घटना की भी हो जांच 
इस मुलाकाट के बाद संजय निरुपम ने जोगेश्वरी स्थित 500 करोड़ रूपये के भूमि घोटाले में मेहता और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे-सीधे जिम्मेदार बताया। उन्होंने आगे कहा कि हमने पुलिस से निवेदन किया है कि वे अजय मेहता और डीपी विभाग के अधिकारियों की जांच करे। यही नहीं इस मामले में विभाग में कार्यरत वाल्मीकि नामके एक प्यून की ट्रेन से गिर कर मौत हो गयी थी, उसे भी निरुपम ने साजिश के तहत हत्या बता कर जांच करने की मांग की।

क्या था मामला?
निरुपम के अनुसार यह जमीन ज्ञानप्रकाश शुक्ल नामके एक शख्स की है जिसने 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि यह जमीन उसकी है और आरक्षण के तहत बीएमसी ने उससे लिया था। लेकिन अधिग्रहण की अवधि समाप्त होने के 10 साल बाद भी बीएमसी अभी तक इस जमीन पर कुछ भी नहीं किया इसीलिए यह जमीन उसे वापस की जाये। बीएमसी की तरफ से उसका पक्ष रखने के लिए कोई वकील भी नहीं था लिहाजा बीएमसी केस हार गयी। जिसके बाद कोर्ट के इस फैसले को लेकर बीएमसी ने ऊपरी अदालत में चुनौती देने से इनकार कर दिया गया।


'दोषियों पर ही कार्रवाई'
संजय निरुपम ने आगे कहा कि हार से झल्लाए बीएमसी कमिश्नर ने हार का सारा दोष बीएमसी के कानून के ऊपर मढ़ दिया। निरुपम ने इस पूरे मामले को बीएमसी आयुक्त और उनकी टीम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक षड्यंत्र बताया। मुंबई कांग्रेस ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हैं उन पर कार्रवाई की जाए। उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है, जबकि डीसीपी ने इस मामले में जांच के लिए के महीने का समय मांगा है। निरुपम ने कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती वे आखिर दम तक लड़ेंगे।

 
बीएमसी में भी हुआ हंगामा 
इस मामले को लेकर बीएमसी में भी हंगामा मचा। कांग्रेस के नगरसेवकों ने इसकी जांच रिटायर जज से कराने की मांग की।साथ ही विधि विभाग के प्रमुख और डीपी विभाग के प्रमुख इंजीनियर को निलंबित करने की मांग की। कांग्रेस के साथ एनसीपी और सपा के नगरसेवकों ने भी इस जांच की मांग की।

आपको बता दें कि जोगेश्वरी में स्थित यह जमीन 13 हजार स्क्वायर मीटर है जिसे गार्डन, अस्पताल और सड़क बनाए जाने के लिए आरक्षित रखा गया था।

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