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कार्यकर्ताओं को बिना मांगे सम्मान देना ही शिवसेना की परंपरा – एकनाथ शिंदे

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कार्यकर्ताओं को बिना मांगे सम्मान देना ही शिवसेना की परंपरा – एकनाथ शिंदे
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छत्रपति शिवाजी महाराज ने अठारह पगड़ जातियों को साथ लेकर स्वराज्य की स्थापना की थी। उसी तरह हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ने भी समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ा और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को बड़े पद देकर उन्हें मजबूत किया। शिवसेना आज भी बाळासाहेब के सपनों और विचारों के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। यह बात शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कही। उन्होंने कहा कि शिवसेना में पार्टी को बढ़ाने के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ता को बिना मांगे ही जिम्मेदारी और सम्मान दिया जाता है। यही शिवसेना की परंपरा और वचन है।(Shiv Sena's tradition is to give respect to workers without asking for it says Eknath Shinde)

शिवसेना महिला सेना के कार्यकर्ताओं को किया संबोधित

इस दौरान उन्होंने राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. ज्योति वाघमारे को दी गई उम्मीदवारी का एक किस्सा भी साझा किया।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शिवसेना महिला सेना की ओर से मुंबई के शीव स्थित षण्मुखानंद सभागार में ‘शिवदुर्गा सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी लाड़ली बहनों को संबोधित करते हुए अपनी भूमिका रखी । इस कार्यक्रम में सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे, राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत, स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, वरिष्ठ नेता गजानन किर्तीकर, राज्य सभा सदस्य मिलिंद देवरा , विधायक डॉ. मनीषा कायंदे, डॉ. ज्योति वाघमारे, कार्यक्रम की संयोजिका शिवसेना नेता मीनाताई कांबळी, प्रवक्ता और उपनेता शीतल म्हात्रे सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।


उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि डॉ. ज्योति वाघमारे के रूप में लाड़ली बहन अब राज्यसभा तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि ठाणे और कल्याण-डोंबिवली जैसे शहरों में आरक्षण नहीं होने के बावजूद महिलाओं को महापौर बनाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि डॉ. ज्योति वाघमारे को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि वह सांसद बनेंगी। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बताया कि उन्होंने वाघमारे से कहा था कि लाड़ली बहन योजना के लिए दिल्ली में एक समिति बनानी है, इसलिए कुछ जरूरी कागजात तैयार कर लें। जब आखिरी दिन उन कागजों पर हस्ताक्षर करने का समय आया, तब उन्हें पता चला कि यह दरअसल राज्यसभा की उम्मीदवारी का आवेदन पत्र है।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना आम लोगों का पार्टी है। अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं और आकांक्षाओं को किनारे रखकर जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए समय देते हैं और अपनी जिम्मेदारियां पूरी ईमानदारी से निभाते हैं, वही शिवसेना की सबसे बड़ी ताकत हैं। ऐसे समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता ही पार्टी को मजबूती देते हैं।

    


उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि तीसरी बार सांसद बने डॉ. श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाया जाए, ऐसा सभी सांसदों का आग्रह था। लेकिन डॉ. श्रीकांत शिंदे ने बहुत ही विनम्रता से इसे ठुकरा दिया और कहा कि किसी वरिष्ठ कार्यकर्ता को मंत्री बनने का अवसर दिया जाए। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यही शिवसेना की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि आम कार्यकर्ताओं की ताकत और लाड़ली बहनों के प्यार की वजह से ही आज एकनाथ शिंदे को पूरे राज्य में लोकप्रियता, मान और सम्मान मिल रहा है।


उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आगे कहा कि स्त्री त्याग की मूर्ति होती है और वह भगवान का ही रूप होती है। स्त्री को ‘माऊली’ कहा जाता है। संत-महात्माओं को छोड़कर किसी भी पुरुष को ‘माऊली’ नहीं कहा जाता। संत ज्ञानेश्वर महाराज को ‘माऊली’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ‘माऊली’ की उपाधि पाना आसान नहीं है। इसके लिए कर्तृत्व, त्याग, संयम और सहनशीलता जैसे गुण होने जरूरी हैं। कार्यक्रम में मौजूद सभी महिलाएं ऐसी ही माऊली हैं। यह कहते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने लाड़ली बहनों के सामने नतमस्तक होकर उन्हें सम्मान दिया।


     

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि स्वयं सहायता समूहों (बचत गट) के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ‘माता सुरक्षित अभियान’ के माध्यम से राज्य की करीब ३ करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की। इस जांच में लगभग १० हजार महिलाओं में कैंसर का पता चला, लेकिन समय पर इलाज और सावधानी बरतने की वजह से उनकी जान बचाई जा सकी।

उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए ‘आरोग्य आपके द्वार’, ‘माता सुरक्षित–परिवार सुरक्षित’ और एचपीवी टीकाकरण जैसे कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।


उद्योग विभाग और जिला योजना समिति (डीपीडीसी) के माध्यम से कोली समाज की महिलाओं को फूड ट्रक भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए उद्योग विभाग को ऐसे और भी कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।

इस मौके पर शिवसेना की राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. ज्योति वाघमारे का विशेष सम्मान भी किया गया।

डॉ. ज्योति वाघमारे ने अपने संबोधन में कहा कि कॉमन मैन के लिए समर्पित नेतृत्व के बाद अब आम लोगों को असाधारण पद तक पहुंचाने वाला नेतृत्व एकनाथ शिंदे का है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए एकनाथ शिंदे ने महिलाओं को सम्मान दिलाने का काम किया और स्त्री शक्ति का हमेशा आदर किया। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि भगवान से भी मनोकामना पूरी कराने के लिए नवस (मन्नत) करनी पड़ती है, लेकिन एकनाथ शिंदे ऐसे नेता हैं जो बिना मन्नत मांगे ही लोगों की इच्छाएं पूरी कर देते हैं। इन शब्दों के साथ डॉ. वाघमारे ने उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।



महिला सेना की ओर से इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली १० कर्तृत्ववान महिलाओं को ‘शिवदुर्गा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इनमें सोनाली कोचरेकर, स्मिता बामने, शुभांगी पाटिल, डॉ. कांचन बागल, सुजाता कोम्मुवाडे, सुवर्णा साबले, कोमल तायडे, दीप्ती इडेकर, स्नेहा गुज्जलवार और एडवोकेट वंदना शेरखाने को मान्यवरों के हाथों पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उद्योग विभाग की ओर से ५० फूड ट्रक भी लाभार्थियों को वितरित किए गए।

लाडकी बहनें तलवार हैं, समशेर की धार हैं

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि लाडकी बहनों की वजह से ही पूरे राज्य में शिवसेना का प्रभाव और जोश दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद सभी लोगों को आगे क्या होगा, इसकी चिंता थी। उस समय मुख्यमंत्री होने के नाते हमने महिलाओं के लिए लाडकी बहन योजना शुरू की। उन्होंने कहा कि विधानसभा और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव में लाडकी बहनों ने साबित कर दिया कि वे सिर्फ वार करने वाली नहीं, बल्कि तलवार और समशेर की धार की तरह मजबूत हैं।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बताया कि पिछले ढाई साल में राज्य में महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें एसटी बसों में महिलाओं को किराए में छूट, मुफ्त उच्च शिक्षा, ‘लेक लाडकी लखपती’ योजना और नाम के आगे मां का नाम लिखने का ऐतिहासिक फैसला शामिल है, जो उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए लिया था।

उन्होंने कहा कि लाडकी बहनों का “लाडका भाऊ”  कहलाना उनके लिए किसी भी बड़े पद से बड़ा सम्मान है।

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