Advertisement

कितने अजीब रिश्ते हैं यहां के...कोरोना ने दिखाया रिश्तों का सच

कोरोना में संकट के समय में, एक चीज जो सामने आई है वो यह कि जहां एक तरफ घरेलू हिंसा में कमी आई है तो वहीं लॉकडाउन के दौरान घरों में साथ-साथ ज्यादा समय गुजारने को मजबूर दंपतियों के बीच घरेलू हिंसा और तलाक के मामलों में भारी इजाफा हो गया है।

कितने अजीब रिश्ते हैं यहां के...कोरोना ने दिखाया रिश्तों का सच
SHARES


कोरोना वायरस जब से दुनिया मे आया है तब से कई लोगों के जीवन में इसका गहरा प्रभाव पड़ा है, चाहे वे सामाजिक हो या आर्थिक हो या धार्मिक या फिर राजनीतिक। जो पति-पत्नी काम के सिलसिले में कभी एक दूसरे से काफी कम मिल पाते थे,लॉकडाउन में काम बंद होने या फिर वर्क फ्रॉम होम होने के बाद वह भी काफी समय से एक दूसरे के साथ हैं, तो ऐसे में कई कपल ऐसे हैं जिनके बीच तकरार बढ़ रही है तो कई ऐसे भी हैं जिनके बीच प्यार भी बढ़ा है।

हमें चीन और हांगकांग की मिसालें देखनी होंगी, क्योंकि नए कोरोना वायरस ने सबसे पहले चीन और हांगकांग पर ही हमला बोला था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के रिश्तों पर बुरे प्रभाव की सबसे बड़ी मिसाल चीन के शांक्ची प्रांत में देखने को मिली है। यहां के शियान शहर में तलाक के मामलों की बाढ़ सी आ गई है। ऑनलाइन दुनिया में शियान डिवोर्स के नाम से हैशटैग पर करीब सवा तीन करोड़ पोस्ट किए जा चुके हैं।

इस समय भारत सहित दुनिया के कई देश कोरोना वायरस के कारण जूझ रहे हैं। भारत में भी कोरोना का काफी प्रसार हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 13 लाख से अधिक कोरोना के मरीज हो चुके हैं। देश की अधिकांश जनसंख्या इस समय कोरोना के ख़ौफ में जी रही है।

जहां एक तरफ तलाक के केस बढ़े हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ देश में घरेलू हिंसा के मामलों में भी काफी कमी आई है। कोरोना में संकट के समय में, एक चीज जो सामने आई है वो यह कि जहां एक तरफ घरेलू हिंसा में कमी आई है तो वहीं लॉकडाउन के दौरान घरों में साथ-साथ ज्यादा समय गुजारने को मजबूर दंपतियों के बीच घरेलू हिंसा और तलाक के मामलों में भारी इजाफा हो गया है। घरेलू हिंसा के मामले भारत सहित यूरोप में भी बढ़ गए हैं। इनसे बचने की हेल्पलाइन पर कॉल की तादाद में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

लेकिन भारत के संदर्भ में बात करें तो पिछले साल की तुलना में इस साल घरेलू हिंसा की दर में लगभग 88 फीसदी की गिरावट आई है।

यह भी पढ़े- KDMC में गुरुवार को 366 नए मरीज आए सामने

मुंबई की रहने वाली कल्पना साठे का कहना है कि, लॉकडाउन से पहले भी उनका पति उनके साथ मार-पीट करता था, लेकिन, लॉकडाउन के बाद जब से वो घर में रहने लगा, तो बात-बात पर झगड़ा होने लगा। घर की साफ-सफाई से लेकर खाना बनाने तक, हर बात को लेकर तनाव बढ़ गया। वो अक्सर बनाया हुआ खाना फेंक देता है, अब कल्पना अपने पति से जल्द से जल्द तलाक लेना चाहती हैं।

तो वहीं मुंबई की ही रहने वाली लक्ष्मी रावत अब खुश हैं। वे कहती हैं कि लॉकडाउन से पहले उनका और उनके पति के साथ आये दिन झगड़ा होता रहता था, वे एक दूसरे से तलाक लेना चाहते थे, लेकिन लॉकडाउन उनके लिये वरदान बन कर आया। वे कहती हैंकि लॉकडाउन में मजबूरी में ही सही हम एक साथ घर मे रहे, मजबूरी में ही सही एक दूसरे से बात की, बात करते करते समय बीतता गया और हमारे बीच विश्वास पैदा हुआ। बदले हुए परिस्थिति के बाद हम पहले एक दूसरे को समझने की कोशिश नहीं करते थे, तो वहीं अब हम आपस मे बात करके मामले को सुलझा लेते हैं। 

इसका कारण बताते हुए मनोचिकित्सक सुरेश अग्रवाल का कहना है कि, लॉकडाउन के कारण लोगों को घर से काम करने की छूट यानी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है। इससे जो पति-पत्नी आपसी अनबन के कारण एक दूसरे का चेहरा देखना पसंद नहीं करते थे, वे अब मजबूरी में ही सही एक दूसरे के साथ समय बीता रहे हैं और उनके बीच संवाद स्थापित हो रहा है। जिससे उनकी आपसी अनबन भी दूर हो रही है। और पारिवारिक विवाद के केस कम आ रहे हैं।

तो वहीं फैमिली कोर्ट के वकील विकास पांडेय का कहना है कि, यह सही है कि कोरोना काल मे लगाए गए लॉकडाउन के कारण तलाक के केस कोर्ट में कम आ रहे हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर धारा 498 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं और पुलिस जांच भी कर रही है। साथ ही कुछ मामलों में आपसी समझौता के तहत केस वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है।

अगर आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जून महीने में धारा 498 के तहत घरेलू हिंसा के 12 मामले सामने आए हैं। तो मई महीने में छह मामले जबकि अप्रैल में केवल 4 मामले दर्ज कराए गए थे। हालांकि, कई मामलों में दर्ज केस को वापस लेने के लिए भी आवेदन किए गए हैं।

यह भी पढ़े- महाराष्ट्र को दुनिया में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधा वाला राज्य बनाना मेरा सपना है : उद्धव ठाकरे

एक अधिकारी ने बताया कि घरेलू हिंसा की घटना 2019 में अधिक थी। पिछले साल जून में घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 498 के तहत 74 मामले दर्ज किए गए थे, तो मई 2019 में 49 मामले और अप्रैल 2019 में 62 मामले दर्ज किए गए थे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मामले फिलहाल लंबित हैं। अन्य मामले की अभी भी जांच चल रही है।

संबंधित विषय
Advertisement