लवाटे दंपत्ति ने स्थगित की इच्छामृत्यु की इच्छा

31 मार्च को इन्होने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मंजूरी मांगी थी लेकिन अभी तक राष्ट्रपति की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसीलिए इन्होने इच्छा मृत्यु करने का अपने फैसले को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दिया है।

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इच्छा मृत्यु के लिए राष्ट्रपति के पास पत्र भेज कर चर्चा में आये लवाटे दंपत्ति ने अब इच्छा मृत्यु का अपना फैसला अभी के लिए स्थगित कर दिया है। बताया जाता है कि 31 मार्च को इन्होने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मंजूरी मांगी थी लेकिन अभी तक राष्ट्रपति की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसीलिए इन्होने इच्छा मृत्यु करने का अपने फैसले को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दिया है। लवाटे दम्पत्ति का कहना है कि उन्होंने अपने फैसले को स्थगित किया है न कि कैंसल।


'बुढ़ापे में नहीं मरना चाहते'

गिरगांव में रहने वाले इरावती लवाटे (78) और नारायण लवाटे  (87) ने राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में कहा था कि बुढ़ापे में उनका कोई सहारा नहीं है। इसीलिए वे इच्छामृत्यु चाहते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि हम लोग इतने दिन साथ में रहें, मौत एक अटल सत्य है, हम चाहते हैं कि जब तक शरीर में ताकत हैं तभी मौत आ जाये तो ठीक है अंगदान भी हो सकता है, बुढ़ापे में मरना कष्टदायक है।

'अभी तक जवाब नहीं आया' 

इन दोनों ने पिछले साल इच्छामृत्यु की मांग की थी। इन्होने 31 मार्च 2018 तक राष्ट्रपति के फैसला आने की अपेक्षा की थी। यही नहीं इन्होने अपने पत्र में यह लिखा था कि अगर उन्हें इच्छामृत्यु की मंजूरी नहीं दी गयी तो वे आत्महत्या कर लेंगे। बावजूद इसके अभी तक रष्ट्रपति की तरफ से इच्छामृत्यु से संबंधित कोई जवाब लवाटे दम्पत्ति को नहीं मिला।  

इस मुद्दे पर सभी के साथ चर्चा करने पर और ऊपर वाले पर श्रद्धा होने के कारण हमने अभी अपना विचार बदला है। इसीलिए इस समय हमने अपनी इच्छा स्थगित कर दी है।
इरावती लवाटे

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