सतीश सबनीस ओपन रैपिड शतरंज चैंपियनशिप: नुबेरशाह शेख रहे प्रथम, नेत्रहीनों में सतीश बागुले मारी बाजी


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शिवाजी पार्क जिमखाना और सतीश सबनीस फाउंडेशन ने 'सतीश सबनीस ओपन रैपिड शतरंज चैंपियनशिप' के 5 वें संस्करण का आयोजन किया गया। हर साल आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में इस बार भी कई बच्चों सहित बुजुर्गो और पुरुष महिलाओं ने हिस्सा तो लिया ही साथ ही नेत्रहीन लोगो ने भी हिस्सा लेकर खेल के प्रति अपनी रूचि दिखाई। यह प्रतियोगिता शिवाजी पार्क जिमखाना में आयोजित की गयी थी।

नुबेरशाह शेख, राकेश कुलकर्णी, ओम खरोला और साईराज चित्तल ने अपने प्रदर्शन से अपने आप को अंतिम समय तक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखा। नुबेरशाह शेख ने प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने 9 वें दौर में आठ अंकों के साथ मुकाबला किया। प्रतियोगिता जीतने के लिए उन्हें 21,000 रुपये, ट्रॉफी और 'ग्रैंडमास्टर' शीर्षक से सम्मानित किया गया।

राकेश कुलकर्णी 7.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें 15,000 रुपये का पुरस्कार मिला, जबकि तीसरे स्थान पर ओम खारोला रहे जिन्होंने 7.5 अंक हासिल किया जबकि साइरस चित्तल चौथे स्थान पर रहे। दोनों को क्रमशः 11,000 रुपये और 9,000 रूपये की इनामी राशि मिली। इस प्रतिस्पर्धा में 290 से अधिक लोगों ने भाग लिया था। यही नहीं इस प्रतियोगिता में 4 साल से लेकर 70 साल की उम्र तक प्रतियोगी थे।

नेत्रहीनों के लिए एक अलग प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। नेत्रहीन प्रतियोगिता में सतीश बागुले ने 5 अंक हासिल कर विजेता बने जबकि सागर मांगूरडे उपविजेता रहे।

इन सभी विजेताओं को भारतीय हॉकी खिलाड़ी युवराज वाल्मिकी और पूर्व भारतीय क्रिकेटर प्रवीण आमरे ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।जोन-5 के डिप्टी कमिश्नर राजीव जैन, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के महासचिव संदीप देशपांडे और वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल मारपकवार टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे।

आपको बता दें कि 1984 में पहली बार सतीश सबनीस शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। सतीश सबनीस अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक शतरंज खिलाड़ी थे। उन्ही के नाम पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। यही नहीं वे महाराष्ट्र चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष थे जबकि ऑल इंडिया चेस फेडरेशन के उपाध्यक्ष भी थे। इसके अलावा वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली दुबई शतरंज ओलंपियाड के प्रबंधक भी थे और इसी टूर्नामेंट से ही भारत के दिग्गज चेस खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने अपना डेब्यू किया था।

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