बेस्ट नहीं रही "बेस्ट"!

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बेस्ट नहीं रही "बेस्ट"!

मुंबई में बेस्ट की बसों और लोकल रेलवे को मुंबई की लाईफलाईन कहा जाता है। जहां एक तरफ लोकल रेलवे के विकास के लिए सरकार कई योजनाएं बना रही है तो वही दूसरी तरफ बीएमसी के अंतर्गत आनेवाली बेस्ट बसे दिन बा दिन और भी आर्थिक कमजोर होती जा रही है। जहां कभी मुंबई में ज्यादातार लोग बेस्ट से सफर किया करते है तो वहीं दूसरी तरफ अब शेयर रिक्शा और टैक्सी की मांग बढने लगी है। अपने घर से स्टेशन तक जाने के लिए लोग जहां पहले बेस्ट की बस से सफर करते थे तो वही अब शेयर रिक्शा और साधनों के पर्याय होने के कारण अब लोग उन साधनों का ज्यादातार उपयोग करते है जिससे ना ही सिर्फ पैसो की बचत  होती है बल्की समय की भी बचत होती है। और इन सबकी मार पड़ती है बेस्ट पर। कभी बेस्ट रहनेवाली बीएमसी की बेस्ट बसें अब बेस्ट होने का अपना ताज खोती जा रही है।


मुंबई में रोजाना लगभग 70 लाख लोग एक जगह से दूसरी जगह ट्रैवेल करते है। कोई अपनी नौकरी के लिए , तो कोई अपने किसी पर्सनल या फिर दिनचर्या कार्य के लिए। और इन लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने में सबसे अहम रोल होता है मुंबई की लोकल और बेस्ट की बसों का। जहां एक तरफ लोकल से लोग दूर दूर की यात्रा करना पसंद करते है तो वहीं नजदीकी दूरी के लिए बेस्ट की बसों को ही पसंद करते आ रहे है, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। प्रतियोगिता के इस जमाने में बेस्ट बाकी प्रतियाभागियों से कही ना कही पिछड़ती जा रही है। जहां पहले अपने घरो से स्टेशन तक जाने के लिए बेस्ट की बसें ही एक मात्र सस्ती पर्यार थी तो वही अब शेयर रिक्शा और कैब की होने की वजह से लोग बेस्ट में जाना कम ही पसंद करते है। इतना ही नहीं, नई नईं कंपनियां जैसे उबर, ओल जैस एप बेस्ट कैब सर्विस प्रोवाईडरो ने अब नजदीकी दूरी के लिए सस्ते और उच्छ ऑफर्स निकालने शुरु कर दिए है। जिससे कई लोग इन एप बेस कैब प्रोवोईडर्स की सर्विस लेना पसंद करते है।

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फिलदाह मौजूदा समय में बेस्ट की एक बस औसतन बीस मिनट की अंतराल पर आती है। इतना ही नहीं , कई रुट पर घाटा उठाने के कारण बेस्ट ने उन मार्गो पर अपनी सेवा बंद कर दी है। घाटे से उबरने के लिए बेस्ट ने 100 बसों को बेच दिया साथ ही लगातार घाटे में चल रही एसी बस सेवाओं को भी बंद कर दिया। इतना ही नहीं , बीएमसी में पिछलें वित्त वर्ष में बेस्ट को 100 करोड़ का बिना ब्याज का लोन दिया था। बावजूद इसके बेस्ट की स्थिती में अभी तक कोई खाल सुधार नहीं हो पाया है।



" शेयर रिक्शा से मुखे कांदिवली स्टेशन से गणेश नगर , चारकोप पहुंचने में 10 से 15 मिनट लगते है तो वही कभी कभार जब मैं बेस्ट से सफर करता हुं तो उतनी ही दूरी के लिए मुझे 40 से 50 मिनट लगते है, जिसमे बस के लिए इंतजार करने का समय भी शामिल है"-  प्रसाद शाहु, आईटी एम्पलॉई


"मुंबई में जनसंख्या की वृद्धि एक बड़ी समस्या है , और इसका सीधा परिणा शहर के ट्रांसपोट और यातायात पर पड़ता है, जहां एक ओर बेस्ट ने बसों की संख्या कम की है तो वीं दूसरी तरफ शहर में लोगों की संख्या दिन बा दिन बढ़ती जा रही है।इतना ही नहीं , कई बार बेस्ट के कर्मचारी यात्रियों से सहीं सलुक नहीं करते, जिसके लिए लोग रिक्शा या सर्विस प्रवोआचर कैब में जाना पसंद करते है"- दिपक पाठक, वकिल


मुंबई में बेस्ट की बसों का युं दम तोड़ना अच्छे संकेत नहीं है, बेस्ट बसों का उपयोग समाज का हर वर्ग करता है , फिर चाहे वो अमीर हो या गरीब। लेकिन बेस्ट युंही मरता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब प्राईवेट गाड़ी वाले अपनी मनमानी करेंगे और उसका सीधा अलर पड़ेगा आम आदमी की जेब पर।


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