गुमशुदा बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने शुरू की विशेष मुहीम


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पश्चिम रेलवे ने कई घरों के चिरागों को उनके घर तक सही सलामत वापस पहुंचाया। ये घर के चिराग अपने घरों से भागे हुए या बिछड़े हुए थे। 2017 में पश्चिम रेलवे ने 1008 लापता बच्चों को उनके घर वालों को सौंपा, इनमे 673 लड़के तो 335 लड़कियां शामिल थीं।


रेलवे चला रही विशेष मुहीम 

आपको बता दें कि रेल मंत्री पियूष गोयल ने वर्ष 2018-19 को महिला व बाल विकास सुरक्षा वर्ष के रूप में घोषित किया है।इसीलिए पश्चिम रेलवे की तरफ से गुमशुदा महिला और बच्चों को ढूंढने के लिए विशेष मुहीम चला रही है। इस मुहीम के तहत पश्चिम रेलवे ने इस साल अभी तक विभिन्न अभियान चला कर 330 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवार वालों को सौंपा। इन 330 बच्चों में 220 लड़के तो 110 लड़कियां शामिल हैं। ये बच्चे लावारिस अवस्था में स्टेशनों पर घूमते मिले थे।


भारत के 88 स्टेशन हैं शामिल 

अब तक पश्चिम रेलवे ने मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस, सूरत, बड़ोदरा, अहमदाबाद, राजकोट, रतलाम सहित अन्य स्टेशनों पर भी लावारिस अवस्था में घूमते हुए बच्चों को उनके घर पहुंचाया। भारतीय रेलवे ने गुमशुदा बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए महिला व बालविकास मंत्रालय की मदद से स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस की शुरुआत की है। इस मुहीम में पश्चिम रेलवे के 7 तो पूरे भारत में 88 रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया है।


बच्चों के लिए हेल्पलाइन

रेलवे ने यात्रियों से भी अनुरोध किया है कि अगर उन्हें रेलवे स्टेशनों पर कोई भी बच्चा लावारिस घूमते हुए नजर आता 1098 नंबर पर सम्पर्क करें। बच्चों के लिए जारी यह हेल्पलाइन 24 घंटो चालू रहती है।

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