'जोगेश्वरी स्टेशन में घट सकती है एलफिंस्टन वाली घटना' संकरा ब्रिज बन सकता है जानलेवा

प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 कॉमन होने के कारण प्लेटफॉर्म पर भीड़ हेमशा रहती है, अगर पीक ऑवर से प्लेटफॉर्म 1 और 2 पर एक साथ ट्रेनें आ जाती हैं तो स्थिति आपे से बाहर होने लगती है। चर्चगेट साइड वाले ब्रिज पर चढ़ने के लिए भीड़ लग जाती है और उसी से लोगों को उतरना भी होता है तो ब्रिज पर भी भीड़ लग जाती है, जिससे कभी भी हादसा घट सकता है।

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हादसों का शहर कहे जाने वाले मुंबई शहर के लिए यह कोई नयी बात नहीं है। जिस तरह से आए दिन हादसे होते रहते हैं अब उससे मुंबईकर आदि हो गए हैं। बस दुःख इस बात का होता है कि सरकार की गलती और लापरवाही के चलते बेचारे मासूम अपनी जान गंवा बैठते हैं। अब हादसे के बाद थोड़े दिन तक राजनीतिक बयानबजी होगी, कुछ लोगों को पकड़ा जायेगा, टीवी चैनलों पर डेबिट होगी, पेपर दुर्घटना वाले न्यूज से रंगीन होते रहेंगे, फिर धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाएगा, लोग भूल जाएंगें। मुंबईकरों की इसी मज़बूरी को लोग स्पिरिट का दाम देते हैं।

'जोगेश्वरी में एलफिंस्टन वाली घटना फिर से घट सकती है'
कहा जाता है कि बीमारी का इलाज करने से पहले बीमारी होने वाले कारणों का इलाज करना चाहिए, लेकिन भारत जैसे देश में ऐसा नहीं किया जाता। यह जो सीएसटी के यहां ब्रिज गिरा बताया जाता है कि उसे ऑडिट में क्लियरेंस दिया गया था, इस ब्रिज के माइनर रिपेयर की बात कही गयी थी। लेकिन अब यह बात संबंधित अधिकारी ही बता सकता है कि उसने किस आधार पर ऑडिट में इसे क्लियरेंस दिया था। इस आधार पर यह कह सकते हैं कि मुंबई में जितने भी ब्रिज के ऑडिट हुए हैं और जिन ब्रिजों को सेफ करार दिया गया है अब उन पर सवाल खड़े हो सकते हैं। बात करते हैं जोगेश्वरी स्टेशन पर बने चर्चगेट की तरफ वाले ब्रिज की। इस समय जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन की स्थिति ऎसी है जहां कभी भी एलफिंस्टन वाली घटना फिर से घट सकती है। एक संकरे ब्रिज पर हजारों यात्री आते जाते हैं।


'होती है काफी भीड़'
रेलवे द्वारा जारी किये गए एक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन उन स्टेशनों में से एक है जहां अधिकांश यात्री दुर्घटना का शिकार होते हैं। ऐसा इसीलिए था कि यहां ईस्ट और वेस्ट दोनों तरफ फाटक खुले हुए थे। अधिकांश यात्री पटरी पार करके फाटक से होकर चले जाते थे जिससे ट्रेन की चपेट में आ जाते थे, जबकि कुछ यात्री ब्रिज पर से आते जाते थे। इन कारणों से प्लेटफॉर्म पर भीड़ जमा नहीं हो पाती थी। लेकिन अब इन फाटकों को बंद कर दिया गया है, लिहाजा ब्रिज से अब प्लेटफॉर्म पर आने वाले यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि हो गयी। यही नहीं ब्रिज से जो सीढ़ी प्लेटफॉर्म पर गयी है वह कुछ संकरी है इस कारण चढ़ते और उतरते समय यात्रियों को काफी परेशानी होती है।  


'ब्रिज है संकरा, भीड़ है अधिक'
पिछले साल ही हार्बर लाइन का प्लेटफॉर्म बनाने के लिए जोगेश्वरी स्टेशन के वेस्ट प्लेटफॉर्म को तोडा गया था। प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 कॉमन होने के कारण प्लेटफॉर्म पर भीड़ हेमशा रहती है, अगर पीक ऑवर से प्लेटफॉर्म 1 और 2 पर एक साथ ट्रेनें आ जाती हैं तो स्थिति आपे से बाहर होने लगती है। चर्चगेट साइड वाले ब्रिज पर चढ़ने के लिए भीड़ लग जाती है और उसी से लोगों को उतरना भी होता है तो ब्रिज पर भी भीड़ लग जाती है, जिससे कभी भी हादसा घट सकता है। जब से फाटक बंद हुआ है तब से यहां 20 से 25 पुलिसकर्मी हमेशा तैनात रहते हैं ताकि वे भीड़ को कंट्रोल कर सकें, लेकिन यह कोई परमानेंट सोल्यूशन नहीं है। इसीलिए रेलवे प्रशासन को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है, वर्ना जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन कभी भी दूसरा एलफिंस्टन (अब प्रभादेवी) साबित हो सकता है। हालांकि रेल प्रशासन अब इस ब्रिज के मरम्मत का कार्य करवा रह है लेकिन वह काफी है यह समझ से परे है। 



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