
महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल एग्रीगेटर (MVA) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिसमें ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित यात्री परिवहन सेवाओं के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा पेश किया गया है।(Maharashtra's New Cab Policy Brings Big Relief for Drivers, New Safety Rules for Passengers)
नई नीति एग्रीगेटर्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य बनाती है, किराए को नियंत्रित करती है, यात्री सुरक्षा को मजबूत करती है, ड्राइवरों को कमाई का बड़ा हिस्सा गारंटी देती है और निजी कारपूलिंग के लिए एक कानूनी ढांचा पेश करती है। यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा देती है और स्थानीय युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखती है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि नियमों का उद्देश्य ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं को यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के हितों की रक्षा करते हुए सुरक्षित, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
एग्रीगेटर्स को राज्य लाइसेंस प्राप्त करना होगा
महाराष्ट्र में संचालित सभी ऐप-आधारित परिवहन एग्रीगेटर्स को अब सेवाएं देने से पहले राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होगा राज्य सरकार GPS ट्रैकिंग के ज़रिए रियल टाइम में एग्रीगेटर गाड़ियों पर नज़र रखने, ड्राइवरों को वेरिफ़ाई करने और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च करेगी।
पहले के सिस्टम के तहत जारी मौजूदा लाइसेंस नए नियमों के नोटिफ़िकेशन से 60 दिनों तक या नए लाइसेंस एप्लीकेशन प्रोसेस होने तक वैलिड रहेंगे।
पैसेंजर सुरक्षा पर खास ध्यान
नए नियमों में पैसेंजर सुरक्षा और सर्विस स्टैंडर्ड पर खास ज़ोर दिया गया है।
हर एग्रीगेटर को 24x7 कस्टमर सपोर्ट सेंटर चलाना होगा, एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा और तय समय में शिकायतों का समाधान करना होगा। नियमों में ये भी ज़रूरी हैं:
रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग और लाइव ट्रिप शेयरिंग
साइबर सिक्योरिटी-सर्टिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन
दिव्यांग लोगों के लिए एक्सेसिबिलिटी फीचर्स
शराब या ड्रग्स के नशे में ड्राइवरों के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी
एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड हर गाड़ी में वैलिड परमिट, इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट, क्लियर किए हुए ई-चालान, पैनिक बटन वाले AIS-140 कम्प्लायंट GPS ट्रैकिंग डिवाइस और फर्स्ट-एड किट होने चाहिए।
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