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लोकल ट्रेन चलाने को लेकर हाई कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण आदेश

सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोकल ट्रेनों में सभी को यात्रा करने की अनुमति नहीं मिली है। साथ ही अन्य परिवहन प्रणालियों जैसे बसों में भीड़ बढ़ती ही जा रही है।

लोकल ट्रेन चलाने को लेकर हाई कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण आदेश
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लोकल ट्रेन (local train) चलाने को लेकर मुंबई हाईकोर्ट (bombay high court) ने कहा है कि, 'लोग बेरोजगार हो रहे हैं, वे भूखे मर रहे हैं। इसलिए, राज्य सरकार को अब योजनाबद्ध तरीके से मुंबई में लोकल ट्रेन और सार्वजनिक परिवहन  (public transport) से यात्रा करने वाले आवश्यक सेवाओं में रत लोगों के अलावा अन्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी अनुमति देने पर विचार करना चाहिए।

राज्य में अनलॉक (unlock) प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई चीजें चरण दर चरण शुरू की गई।  कंपनियों और कार्यालयों में बढ़ती उपस्थिति की भी अनुमति दी गई है। लेकिन सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोकल ट्रेनों में सभी को यात्रा करने की अनुमति नहीं मिली है। साथ ही अन्य परिवहन प्रणालियों जैसे बसों में भीड़ बढ़ती ही जा रही है। जिसके परिणामस्वरूप, सोशल डिस्टेंस (social distance) नियमों का उल्लंघन धड़ल्ले से हो रहा है।

लोगों की परेशानियों को देखते हुए राजनीतिक दलों और यात्री संगठनों द्वारा भी आम लोगों के लिए लोकल ट्रेन शुरू करने की मांग लगातार कर रहे हैं। इस समय लोकल ट्रेनों में केवल आवश्यक सेवा कर्मियों को ही यात्रा की अनुमति दी गयी है।

इसके पहले वकीलों ने यात्रा के लिए अनुमति देने संबंधी याचिका दायर की थी। इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति के.  गिरीश कुलकर्णी की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की।

अदालत ने सुनवाई में वकील संगठन को उचित सुझावों के साथ आने का निर्देश दिया, साथ ही न केवल वकीलों के लाभ के लिए, बल्कि समाज के सभी वर्गों को भी सुविधा देने संबंधी सुझावों पर विचार भी करने को कहा।

अदालत ने वकीलों संगठनों को राज्य सरकार को अपने सुझाव प्रस्तुत करने और 5 अक्टूबर तक हलफनामे पर अपने विचार प्रस्तुत करने के निर्देश दिए कि क्या सुझावों पर विचार किया जा सकता है और उन्हें लागू किया जा सकता है?

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