बायोपिक दूध या चाय वाले पर भी बनाई जा सकती है: आयुष्मान खुराना

फिल्म 'बधाई हो' के लिए दिए इंटव्यू में आयुष्मान खुराना ने कहा, आप जिस चीज में रुची रखते हैं, जो आपका पैशन है, वह अपने आप ही हो जाता है। मुझे शायरी के लिए वक्त निकालना नहीं पड़ता, अपने आप निकल जाता है।

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‘विकी डॉनर’ फिल्म से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री करने वाले एक्टर आयुष्मान खुराना एक्टिंग तक ही सीमित नहीं है। सिंगिंग, राइटिंग में भी उनकी गहरी रुची है। आयुष्मान ने खुद की फिल्मों में गाना गाए हैं और ये गाना हिट भी रहे हैं। इसके अलावा उन्हें शायरी लिखने में भी गहरी रुची है। आयुष्मान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘अंधाधुन’ ने अंधाधुंध कमाई कर साबित कर दिया है कि आयुष्मान एक बेहतरीन एक्टर हैं। साथ ही ‘अंधाधुन’ का बाजार ठंडा पड़े उससे पहले ही आयुष्मान की आगामी फिल्म ‘बधाई हो’ रिलीज के लिए तैयार  है। इस फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर खूब पसंद किया जा रहा है। फिल्म की रिलीज से पहले आयुष्मान ने ‘मुंबई लाइव’ से खास बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने फिल्म और पर्सनल लाइफ से जुड़े सवालों का खुलकर जवाब दिया।


बधाई हो’ फिल्म से कैसे जुड़े?
जब कोई अच्छी स्क्रिप्ट मेरे सामने आती है, तो मुझसे रहा नहीं जाता। मैंने ‘बधाई हो’ की स्क्रिप्ट सुनी और सुनते ही हां बोल दिया था। यह मेरी लाइफ में दूसरी बार हुआ है, जब मैंने लगेहाथ किसी फिल्म को हां बोला। इससे पहले ‘दम लगा के हईशा’ को हां बोला था। मैं बेहद खुश हूं कि यह स्क्रिप्ट मेरे पास आई और मैंने इसे हां बोला।

 अगर आपकी रियल लाइफ में ‘बधाई हो’ जैसे होता तो आप कैसे रिएक्ट करते? 

मैं ऐसे ही रिएक्ट करता, जैसे फिल्म में कर रहा हूं। मैं वही सोचकर एक्टिंग ही करता हूं, कि अगर मेरी मां प्रेग्नेंट हो जाती तो मैं क्या करता कैसे रिएक्ट करता। सामान्य सी बात है, मैं शर्मिंदां ही महसूस करता। पर फिल्म में यह मेसेज मिलेगा कि मम्मी पापा को भी सेक्स करने का हक है।

 नमस्ते इंग्लैंड’ के साथ क्लैश को कैसे देखते हैं?

आज के समय में सोलो रिलीज मुश्किल हो गया है। फिल्में बहुत बन रही हैं पर महीने में चार ही शुक्रवार आते हैं। वैसे भी दोनों अलग अलग जौनर की फिल्में हैं, इसलिए ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

आपकी खुद की फेवरेट फिल्म कौन सी है और क्यों?

‘दम लगा के हईशा’ मेरी फेवरेट फिल्म है। एक पंजाबी होते हुए मैंने फिल्म के लिए उस तरह का एक्सेंट पकड़ा। मैंने पूरी तरह से फिल्म के लिए अपनी बॉडी लैंग्वेज को बदला। मैं निजी जीवन में बिलकुल भी प्रेम प्रकाश तिवारी की तरह नहीं हूं। मुझे यह फिल्म करके गर्व महसूस हो रहा है।

किसी की बायोपिक है जहन में आप जिसे करना ताहते हों? 

 सबकुछ निर्भर करता है स्क्रिप्ट पर, मैं किसी की बायोपिक करना चाहता हूं इसका यह मतलब नहीं की स्क्रिप्ट कुछ भी हो। बायोपिक एक आम इंसान की भी हो सकती है। जरूरी नहीं है कि बायोपिक किसी सेलिब्रिटी या बड़े एक्टर की हो। बायोपिक किसी दूध वाले या चाय वाले पर भी बनाई जा सकती है। पर हां बायोपिक एंटरटेनिंग के साथ साथ मीनिंगफुल भी हो।

ट्विटर पर अक्सर शायरी लिखते हैं, समय कैसे मैनेज करते हैं?
आप जिस चीज में रुची रखते हैं, जो आपका पैशन है, वह अपने आप ही हो जाता है। मुझे शायरी के लिए वक्त निकालना नहीं पड़ता, अपने आप निकल जाता है।

ऐसा कभी हुआ है कि आपने किसी फिल्म को मना किया और फिर पछतावा हुआ हो?

मुझे किसी फिल्म को मना करने का पछतावा कभी नहीं हुआ। ज्यादातर जिन फिल्मों को मैंने मना किया वे फिल्में चली ही नहीं हैं। कभी कभी डेट की वजह से भी फिल्मों को मना करना पड़ा है, पर जब वह फिल्म भी चल गई और मेरी फिल्म भी तो कोई दुख या पछतावा नहीं होता।

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