‘खानदानी शफाखाना’ लोगों को सेक्स जैसे मुद्दे पर बात करने के लिए करेगी मजबूर: सोनाक्षी सिन्हा

फिल्म का वन लाइनर ‘लड़की मामा जी का सेक्स क्लीनिक चलाती है’ यह मुझे सुनाया गया था। इसे सुनने के बाद मेरा पहला रिएक्शन था कि ये लोग मेरे पास यह फिल्म लेकर क्यों आए हैं?

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‘दबंग’ और ‘लुटेरा’ जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का परिचय दे चुकीं बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा को आखिरी बार करण जौहर की फिल्म ‘कलंक’ में देखा गया था। फिल्म तो दर्शकों को खास पसंद नहीं आई, पर सोनाक्षी ने अपनी अदाकारी के लिए तारीफें जरुर बटोरी। अब सोनाक्षी सिन्हा एक ऐसी फिल्म लेकर आ रही हैं, जिसकी वन लाइनर सुनकर वो खुद हैरान रह गई थीं। यह फिल्म है ‘खानदानी शफाखाना’, जिसमें वे बेबी बेदी का किरदार निभाएंगी और सेक्स क्लीनिक चलाएंगी। फिल्म सेक्स जैसे सेंसटिव मुद्दे पर है, जिस पर बात करने से हमारा समाज आज भी कतराता है। फिल्म की रिलीज से पहले हमने सोनाक्षी से खास मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने फिल्म और पर्सनल जिंदगी से जुड़े सवालों का खुलकर जवाब दिया।

खानदानी शफाखाना की स्क्रिप्ट सुनकर आपका पहला रिएक्शन क्या था?

फिल्म का वन लाइनर ‘लड़की मामा जी का सेक्स क्लीनिक चलाती है’ यह मुझे सुनाया गया था। इसे सुनने के बाद मेरा पहला रिएक्शन था कि ये लोग मेरे पास यह फिल्म लेकर क्यों आए हैं? क्या ये जानते नहीं हैं कि मैं सिर्फ फैमिली फिल्म करती हूं। इसके बाद मैंने स्क्रिप्ट सुनी। मैंने कहा कि यह फिल्म तो मैं जरूर करूंगी। मुझे फिल्म का मुद्दा बेहद खास और प्रासांगिक लगा।

आपकी मां का क्या रिएक्शन था इस फिल्म के लिए? 

मां ने भी पहले वन लाइनर सुना और बोली ऐसी फिल्म तुम कैसे कर सकती हो? पर जब उन्होंने स्क्रिप्ट सुनीं तो उन्होंने तनिक भी देर नहीं लगाई अप्रूवल के लिए। मम्मी का अप्रूवल मुझे हमेशा तसल्ली देता है। उसके बाद ट्रेलर रिलीज हुआ। पर मैं परेशान थी कि मम्मी का फोन नहीं आया। मैंने फोन में पूछा आपने ट्रेलर देखा बोलीं हां देखा, तो मैंने पूछा फिर आपने फोन क्यों नहीं किया? बोलीं- ओह...मैं सबको ट्रेलर दिखा रही थी।

क्या यह टॉपिक सच में टफ था?

बेशक टफ था। क्योंकि हमारा कल्चर ऐसा है कि हमें बचपन से ही सिखाया जाता रहा है कि हमें इस टॉपिक पर बात नहीं करनी है। पर यह फिल्म उसी टॉपिक पर है कि हम क्यों बात नहीं कर रहे, हमें बात करनी चाहिए। हम इस दुनिया में हैं तो उसी के चलते हैं। फिर यह इतना जरूरी मुद्दा गंदा या टैबू कैसे हो गया।

क्या आपको लगता है इस फिल्म को देखने के बाद लोगों के अंदर जागरुकता आएगी? 

जरूर आएगी, क्यों नहीं आएगी। पर निर्भर करेगा कि लोग उससे कितना अपनाते हैं। इससे पहले भी ऐसे ही मुद्दों पर ‘विकी डॉनर’ और ‘शुभ मंगल सावधान’ जैसी फिल्में बन चुकी हैं और लोगों ने इन्हें पसंद भी किया है। हम उम्मीद करते हैं कि लोग इस फिल्म को देखें और जानने की कोशिश करें कि यह टॉपिक टैबू कैसे बन गया।

कुछ राज्यों में सेक्स एजुकेशन बैन है क्या कहेंगी?

यह बात तो निश्चित ही गलत है। क्योंकि आप एक बच्चे को जिस चीज के लिए मना करोगे, उसकी रुचि उसी ओर जागेगी। एक देश के लिए भी वही बात लागू होती है। जब आप बड़े हो रहे होते हैं, तो आपको इस बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। जागरुकता न होने पर बच्चे गलत दिशा में भी जा सकते हैं। अगर वो इन चीजों के बारे में जागरुक हैं, तो किसी परेशानी में फंसने से बच सकते हैं।   

जब आपकी कोई फिल्म फ्लॉप होती है, तो इस असफलता को कैसे हैंडल करती हैं?

सफलता और असफलता जीवन के दो अहम हिस्से हैं। फिल्म आपने बना दी, अपनी मेहनत उसमें डाल दी और दर्शकों को पसंद नहीं आई तो आप क्या कर सकते हैं। नहीं पसंद आई तो नहीं आई। पर ऐसा भी नहीं है कि खराब नहीं लगता, फिल्म फ्लॉप होती है तो निराशा जरुर होती है।

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