Interview-दर्शक हमेशा सही होते हैं: आशुतोष गोवारिकर

‘लगान’, ‘स्वदेश’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाने के बाद एक बार फिर आशुतोष गोवारिकर बड़े पर्दे पर इतिहास के पन्नों को पलटने वाले हैं। मराठा योद्धा सदाशिव राव भाऊ और पानीपत की लड़ाई पर बेस्ड फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज के लिए तैयार है।

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‘लगान’, ‘स्वदेश’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाने के बाद एक बार फिर आशुतोष गोवारिकर बड़े पर्दे पर इतिहास के पन्नों को पलटने वाले हैं। मराठा योद्धा सदाशिव राव भाऊ और पानीपत की लड़ाई पर बेस्ड फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म में अर्जुन कपूर, कृति सेनन और संजय दत्त प्रमुख भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज से पहले मुंबई लाइव ने आशुतोष गोवारिकर से खास मुलाकात कर फिल्म के अलावा उनकी निजी जिंदगी के बारे में भी जानने की कोशिश की।

अर्जुन, कृति और संजय ने इससे पहले कोई ऐतिहासिक फिल्म नहीं की है, इनको कास्ट करने में आपको कोई रिस्क नजर नहीं आया?

इसीलिए मैंने उनको कास्ट किया। अगर उन्होंने इस तरह की फिल्में की होती तो शायद मैं उन्हें नहीं लेता। मेरा मानना है कि कुछ नया करने के लिए होना चाहिए। जैसे आमिर ने कभी किसान का किरदार नहीं निभाया था। ऋतिक ने अकबर प्ले नहीं किया था वहीं शाहरुख ने भी इस तरह का किरदार कभी भी नहीं निभाया था। इसी में एक नई बात होती है।

आमिर खान के साथ आपके अच्छे रिश्ते हैं 'पानीपत' के लिए आपने उनको अप्रोच नहीं किया? 

नहीं, जब मैं स्क्रिप्ट लिखता हूं, उसी वक्त मेरी कास्ट मेरे दिमाग में होती है। तो जब मैंने सदाशिव राव भाऊ का एक डिस्क्रिप्शन व उनके स्टाइल से वाकिफ हुआ तो वह मुझे अर्जुन से हू-ब-हू मिलता हुआ लगा। कृति दिल्ली से हैं, पर उनमें एक क्वालिटी महाराष्ट्रीयन की भी है। साथ ही संजय के साथ भी मुझे काम करना था, पर कभी मौका नहीं मिला था। अबदाली जैसी पर्सनाल्टी को संजय ही प्ले कर सकते हैं। 

'पानीपत' को 'बाजीराव मस्तानी' के साथ कंपेयर किया जा रहा है, इस पर आप क्या कहेंगे?

वैसे देखा जाए तो हर फिल्म को किसी ना किसी फिल्म के साथ कंपेयर किया जाता है। जैसे मैंने जब 'जोधा अकबर' बनाई तो इसको डायरेक्ट 'मुगले आजम' से कंपेयर किया गया। पर जब लोगों ने फिल्म देखी तो यह एकदम अलग निकली। जब 'बाजीराव मस्तानी' आई तो लोगों ने उसे 'जोधा अकबर' से कंपेयर करना शुरु किया और 'पद्मावत' आई तो लोगों ने 'बाहुबली' से कंपेयर किया। लोगों ने 'चक दे' को भी लगान से कंपेयर किया था।

फिल्म की असफलता को आप कैसे हैंडल करते हैं?

जब कोई फिल्म नहीं चलती है, तो दुख तो होता है। मैंने पहली फिल्म बनाई थी ‘पहला नशा’ और यह बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी, तो मुझे लगा था कि दर्शकों को कुछ समझ में ही नहीं आता। मैंने इतनी महान फिल्म बना दी और किसी को समझ में नहीं आई। उसके बाद मेरा पूरा यकीन है कि दर्शक हमेशा सही होते हैं। जब फिल्म नहीं चलती है, तो मैं तत्काल, जनता के क्या रिएक्शन हैं? क्या रिस्पॉन्स हैं? ऑडियंस को फिल्म में क्या कमियां नजर आई? इस पर मेरा काम शुरु हो जाता है। ताकि मैं गलतियों को दोहरा ना सकूं। भले ही नई गलतियां हौं, पर वही गलतियां ना दौहराऊं।

मोहनजो दारो में जो गलतियां आपने की हैं पानीपत में उससे बचे हैं?

‘मोहनजो दारो’ की स्क्रिप्ट से लोग इमशोनली कनेक्ट नहीं हो पाए थे। इमोशन्स को मजबूत करना बहुत जरूरी था। तो इस फिल्म में मैंने बारीकी से उस पर काम किया है।

सोशल मीडिया की ट्रोलिंग को कैसे हैंडल करते हैं? 

पहले क्या होता था, सिर्फ सिलेक्टेड मीडिया के लोग ही रिएक्ट कर सकते थे, क्योंकि उनके हाथ में पेन था। पर अब पेन की जगह सेलफोन आ गए हैं। अब सेलफोन ही पेन बन गया है और हर किसी के पास है, तो हर कोई रिएक्ट कर सकता है। उसे हम पहचानते नहीं हैं, तो उसके मन में जो आता है वह कह रहा है। उसके मन में कोई डर नहीं है। जब कोई ट्रोल करता है तो मैं उसको समझने की कोशिश करता हूं, कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।

कोई वेब सीरीज बनाने की योजना है? 

वेब सीरीज एक बहुत ही मुश्किल माध्यम है। 10 एपिसोड बनाने होते हैं एक 1-1 घंटे के, मेरे लिए तो ये 5 फिल्में ही हैं। 2-2 घंटे के हिसाब से देखें तो 5 फिल्में बनेगी इतने समय में। मुझे वैसे भी एक फिल्म को बनाने में 3 साल लगते हैं और ये बनाने जाऊंगा तो मुझे 7-8 साल लग जाएंगे। इसलिए मैं फिलहाल कोई वेब सीरीज नहीं बनाना चाहता हूं। 

'पानीपत' ट्रेलर यहां देखें-


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