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Interview: ‘साहो’ के बाद पांडु से पांडे जी बन गया हूं - चंकी पांडे

चंकी पांडे ने इंटरव्यू में बताया, 1993 में ‘आंखे’ जैसी हिट फिल्म देने के बाद मेरे पास कोई काम ही नहीं था। समझ में नहीं आ रहा था, क्या करूं, तो मैंने अलग अलग बिजनेस शुरु किए। इसी दौरान मुझे बांग्लादेशी फिल्म में काम करने का ऑफर मिला।

Interview: ‘साहो’ के बाद पांडु से पांडे जी बन गया हूं - चंकी पांडे
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1987 में फिल्म ‘आग ही आग’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाले एक्टर चंकी पांडे ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया है। उन्हें फिल्म ‘तेजाब’ से काफी लोकप्रियता मिली। उनपर फिल्माया गया गाना ‘सो गया’ जबरदस्त हिट साबित हुआ। 1987 से 1993 तक का चंकी का फिल्मी सफर काफी शानदार रहा। पर इसके बाद अचानक से इन्हें फिल्में मिलनी बंद हो गईं और चंकी को बाग्लादेश का रुख करना पड़ा। पर 7 साल के बाद इनकी पत्नी ने फिर इन्हें बॉलीवुड की ओर प्रेरित किया। जिसके बाद ये ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बनें। पर हालिया रिलीज हुई फिल्म ‘साहो’ ने चंकी पांडे की एक नई इमेज स्थापित कर दी है। हाल ही में मुंबई लाइव ने चंकी पांडे से खास मुलाकात की। जिसमें उन्होंने अपनी फिल्म, किरदार और पर्सनल जिंदगी से जुड़े सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।   

साहो जैसी बड़ी फिल्म में मुख्य खलनायक का किरदार मिलना और उसके बाद तारीफें बटोरना इस सबको कैसे देखते हैं?
मैंने पहले सोचा नहीं था कि यह किरदार मुख्य खलनायक होगा। फिल्म के डायरेक्टर (सुजीत) ने मेरी एक फिल्म देखी थी ‘बेगमजान’, उसमें मेरा खतरनाक कैरेक्टर था, पर वह 1947 का था। जिसमें मैंने काले दांत के साथ लुंगी और बनियान पहन रखी थी। सुजीत ने फोन पर कहा कि मैं एक फिल्म बना रहा हूं, फिल्म मॉडर्न है और मैं तुम्हें इसमें विलेन देखता हूं। आप इस फिल्म के विलेन हो, साथ ही उन्होंने कहा कि इस फिल्म में और भी विलेन हैं। उन्होंने मुझे दो सीन भी सुनाए, जिसमें वह एक जगह अपने पिता का गला पकड़ लेता है और दूसरा प्रभास के साथ था। मैंने उसी समय इसे हां कह दिया था। मुझे समझ गया था कि फिल्म में ग्रे कैरेक्टर तो काफी हैं पर फुल डार्ड कैरेक्टर मेरा ही है। पर मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी कि दर्शकों को मेरा काम इतना ज्यादा पसंद आएगा।

फिल्म इंडस्ट्री का क्या रिएक्शन है, क्या आपको ज्यादा फिल्में ऑफर होने लगी हैं?

‘साहो’ को रिलीज हुए 2-3 दिन ही हुए थे कि मुझे 3 फिल्मों के ऑफर आ गए। जिसमें से एक बॉलीवुड और दो साउथ की फिल्मों के ऑफर आए हैं। मैं चाहता हूं कि इस पल को मैं थोड़ा सेलिब्रेट करूं उसके बाद सोचूंगा हूं कि मैं क्या करूंगा, कैसे करूंगा।

आपने ज्यादातर कॉमेडी भरे किरदार निभाए हैं, विलेन का किरदार निभाना मुश्किल था?

‘साहो’ के सेट पर सब तेलुगू बोलते थे। सिर्फ डायरेक्टर अंग्रेजी बोलते थे। मेरे पास कोई बात करने के लिए होता ही नहीं था। तो मैंने पहली बार सोचा चलो किरदार में घुसते हैं, उसके बाद मैं देवराज ही बनगर सोता और देवराज ही बनकर जागता था। मैं इतना खतरनाक हो गया था कि आप यकीन नहीं कर पाते कि मैं चंकी पांडे हूं। मैं छोटी छोटी बातों में गुस्सा हो जाता था।

किरदार से बाहर कैसे निकले?

घर आने के बाद थोड़ा दादागिरी करने की कोशिश की, पर चल नहीं पाया। ज्यादा करता तो पत्नी के हाथ से डंडे और खाने पड़ते। आजकल मेरी पत्नी देखती है कि चंकी सो गया कि नहीं। डरती रहती है कि कहीं मैं उसका मर्डर ना कर दूं...हंसते हुए। इस फिल्म के बाद से मैं पांडु से पांडे जी हो गया हूं।

आपको लगता है कि बांग्लादेशी फिल्में आपको पीछे ले गईं, नहीं तो आज आप बॉलीवुड में और अच्छे मुकाम पर होते?

देखिए मैं बताता हूं। 1993 में ‘आंखे’ जैसी हिट फिल्म देने के बाद मेरे पास कोई काम ही नहीं था। समझ में नहीं आ रहा था, क्या करूं, तो मैंने अलग अलग बिजनेस रेस्टॉरेंट और इवेंट मेनेजमेंट कंपनी शुरु की। इसी दौरान मुझे बांग्लादेशी फिल्म में काम करने का मौका मिला। मैंने पहली बार बाग्लादेशी फिल्म की और वह सुपर डुपर हिट हो गई और धीरे धीरे मैं वहां फंस गया। फिर मेरी शादी हुई, मेरे पास समय नहीं था तो मैं जहां रहता था बांग्लादेश में वहीं मैं उनको हनीमून के लिए लेकर गया। मेरी पत्नी ने कहा, चंकी तेरी पहचान बॉलीवुड की वजह से यहां पर है। तुम यहां पर सुपरस्टार हो तो बॉलीवुड की वजह से, तुम्हारी जगह यहां नहीं बॉलीवुड में हैं। तब मैं इंडिया वापस आया। मैंने 7 साल बांग्लादेश में बिता लिए थे, लोग यहां पर मुझे भूल गए थे। मुझे लोगों के ऑफिस में जा-जाकर काम मांगना पड़ा तब जाकर मुझे हैरी बवेचा की फिल्म, रामगोपाल वर्मा की फिल्म और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्में मिली। पर हां यह भी सही है, मैं यहां पर ही रहता और काम मिलता तो आज अलग बात होती।

आपको क्या लगता है पहले के मुकाबले आज फिल्मों में काम मिलना आसान हो गया है

आज आपके पास इंस्टाग्राम है, ट्विटर है, यूट्यूब है, आज प्रोड्यूसर कम मिलते हैं कास्टिंग डायरेक्टर पर आश्रित हो जाते हैं कि आप कास्ट लेकर आओ। हमारे समय पर ऐसा कुछ भी नहीं था। प्रोड्यूसर का अपॉइंटमेंट लेकर जाना पड़ता था। साथ में फोटोज़ होनी जरूरी होती थी। स्क्रीन टेस्ट देना पड़ता था। पर यह सब अब बहुत आसान हो गया है। जो भी एक्टर बनना चाहते हैं, मैं बस यह कहना चाहूंगा कि मुंबई आ जाओ और इंडस्ट्री का हिस्सा बन जाओ। असिस्टेंट डायरेक्टर बन जाओ, प्रोडक्शन में घुस जाओ। कुछ भी करो पर आप बॉलीवुड से जुड़ जाओ। ताकि आपको पता रहे कि कब कहां क्या होने वाला है।

अनन्या पांडे की सो पॉजिटिव मुहिम को आपका कितना समर्थन?

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Happy Diwali🤗💖😍🥂

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मैंने उसको बहुत फोर्स किया था, कि जो ये बुलिंग हो रहा है, तेरे ऊपर इल्जाम लग रहे हैं कि कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए झूठ बोला था, प्लीज तू यह सब स्पष्ट कर। क्यों चुप बैठी है? उसने बोला, मैं इसलिए चुप हूं क्योंकि मैं सच जानती हूं। मैंने कहा नहीं, यह बात सबको बतानी पड़ेगी, नहीं तो लोग हमें झूठा समझेंगे। और तेरे पास सारे दस्तावेज हैं। तब एक महीने के बाद उसने यह मुहिम शुरु की। जब उसने इसका रिएक्शन देखा, तब उसे समझा कि यह बुलिंग बहुत ही खराब चीज है। आज वह अच्छे से कर रही है, मुझे उसपर बहुत गर्व है और मैं बहुत खुश भी हूं कि इतनी कम उम्र में वह यह सब कर रही है।


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