Arjun Patiala Movie Review: दिलजीत नहीं जीत पाए दिल!

फिल्म का हीरो दिलजीत दोसांझ है, जो बोलता है ‘अब पटियाला आ गया है, अब फालतू के मुकदमें नहीं होंगे, डायरेक्ट फैसले होंगे।‘ लेकिन अब इनका फैसला जनता करने वाली है। जोकि फिल्ममेकर को महंगा पड़ सकता है।

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‘हिंदी मीडियम’ और ‘स्त्री’ फिल्म के निर्माता लेकर आए हैं स्पूफ कॉमेडी फिल्म‘अर्जुन पटियाला’। इस तरह की फिल्मों में एक्टर खुद पर कॉमेडी करते हैं और दर्शक हंसते हैं। पर इस फिल्म के साथ ऐसा नहीं हो सका है। एक्टर ने खुद पर कॉमेडी करने की कोशिश की पर आपको यह कॉमेडी बोर करेगी।   

फिल्म का हीरो दिलजीत दोसांझ है, जो बोलता है ‘अब पटियाला आ गया है, अब फालतू के मुकदमें नहीं होंगे, डायरेक्ट फैसले होंगे।‘ लेकिन अब इनका फैसला जनता करने वाली है। जोकि फिल्ममेकर को महंगा पड़ सकता है।

फिल्म की शुरुआत एक डायरेक्टर (अभिषेक बैनर्जी) और प्रोड्यूसर (पंकज त्रिपाठी) से होती है। डायरेक्टर प्रोडड्यूसर को फिल्म की कहानी नरेट करता है। उसकी कहानी में हीरो अर्जुन पटियाला (दिलजीत दोसांझ) है, एक हीरोइन रितु रंधावा (कृति सेनन) है, 5 विलेन और एक अनावश्यक आयटम सॉन्ग है। अर्जुन स्पोर्ट्स कोटे से सब इंस्पेक्टर बनता है और उसकी पोस्टिंग फिरोजपुर होती है। यहीं पर उसकी मुलाकात मुंशी ओनिडा सिंह (वरुण शर्मा) से होती है। जिसके नाम के पीछे की भी एक कहानी है। साथ ही अर्जुन को लगे हाथ रितु रंधावा से प्यार भी हो जाता है। इसके बाद कहानी इंट्रेस्टिंग होनी चाहिए तो बोरिंग हो जाती है। फर्स्ट हाफ के बाद सेकंड हाफ से भी उम्मीदें बढ़ती हैं, उम्मीदें सिर्फ उम्मीदें ही रह जाती हैं।

फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद बेजान नजर आती है। स्टारकास्ट ने हंसाने के लिए जीजान लगाई, पर 2-3 जगह छोड़ दिया जाए तो वे दर्शकों को गुदगुदाने में भी सफल नजर नहीं आते।

देखिए पब्लिक रिव्यू


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