Malaal Review: शिवा और आस्था की लव स्टोरी है ‘मलाल’

फिल्म की कहानी कोई नई नहीं है, इसलिए यह फिल्म कहीं न कहीं डायरेक्शन के ऊपर निर्भर थी। लेकिन मंगेश इसमें कामयाब नहीं हुए।

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संजय लीला भंसाली का नाम जिस भी फिल्म से जुड़ता है लोगों के जहन में कुछ तस्वीरें आना शुरु हो जाती हैं, जैसे जबर्दस्त सेट, बेहतीन गाने आदि। कुछ भी कहों भंसाली का स्वैग कुछ अलग है और उनके जैसे फिल्में बनाना किसी भी फिल्ममेकर के लिए इतना आसान नहीं होता। आज उनके ही प्रोडक्शन की बनी फिल्म ‘मलाल’ रिलीज हो गई है। पर आप इस फिल्म से ज्यादा उम्मीदें नहीं जोड़ सकते, क्योंकि इस फिल्म को भंसाली ने नहीं मराठी डायरेक्टर मंगेश हडावले ने डायरेक्ट की है। इस फिल्म से एक्टर जावेद जाफरी के बेटे मीजान जाफरी और संजय लीला भंसाली की भांजी शर्मिन सेगल ने डेब्यू किया है। इस फिल्म की कहानी में कुछ नया नहीं है। आपने इस तरह की लव स्टोरी बहुत देखी होंगी जिसमें लड़की लायक और लड़का नालायक हो।

कहानी 

फिल्म की कहानी 90 के दशक की है, जो कि शिवा मोरे (मीजान जाफरी) से शुरु होती है। शिवा एक चॉल में रहता है। जिसे एक मराठी पार्टी का नेता पसंद करता है और अपने अंडर में काम करने का मौका देता है। नेता का मकसद है कि मीजान, गैर हिंदी भाषी लोगों को मुंबई में आगे न बढ़ने दे। इसी बीच शिवा के चॉल में आस्था (शर्मिन) सेगल शिफ्ट होती है। जो कि गैर हिंदी भाषी है, जिसकी वजह से वह आस्था से नफरत करता है और देखते ही देखते उसकी नफरत प्यार में बदल जाती है। आस्था भी शिवा से प्यार करने लग जाती है। साथ ही आस्था की वजह से शिवा नालायक से लायक बन जाता है, सिगरेट, दारू छोड़कर नौकरी करने लग जाता है। पर आस्था की फैमिली इस रिश्ते के सख्त खिलाफ है। खिलाफ होने की वजह उनका स्टेटस है, पहले वे अमीर थे, बंगला में रहते थे। पर बिजनेस में नुकसान होने की वजह से उन्हें चॉल में रहना पड़ रहा है।

एक्टिंग

मीजान जाफरी और शर्मिन सेगल के परिवार वालों का किरदार निभाने वाले सभी एक्टर्स अपने अपने किरदार में फबे हैं। मीजान की मां का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस ने तो मानो किरदार में जान छिड़क दी है। मीजान का यह शानदार डेब्यू कहा जा सकता है। उन्हें देखकर ऐसा बिलकुल भी नहीं लगा कि वे नए एक्टर हैं। उन्हें देखकर साफ नजर आता है कि किरदार में ढलने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। शर्मिन, भंसाली की भांजी हैं, दर्शकों को उनसे ज्यादा उम्मीदें होंगी, पर पहली फिल्म में वे उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हैं।

म्यूजिक 

'आई शपथ' गाने को छोड़ दिया जाए तो और कोई भी गाना आपको थिएटर से बाहर याद नहीं रहेगा। गानों को देखकर भंसाली की फिल्मों की याद जरूर ताजा होती है।

डायरेक्शन 

फिल्म की कहानी कोई नई नहीं है, इसलिए यह फिल्म कहीं न कहीं डायरेक्शन के ऊपर निर्भर थी। लेकिन मंगेश इसमें कामयाब नहीं हुए। मराठी राजनेता कि किरदार को और बड़ा बनाया जा सकता था। लेकिन उसे जल्दी ही साइड लाइन कर दिया गया। फिल्म में सस्पेंस कहीं भी नजर नहीं आया।

रेटिंग्स  2.5/5 

क्यों देखें

अगर आप लव स्टोरी के शौकीन हैं और मीजान की बेहतरीन एक्टिंग को देखना चाहते हैं, तो इस फिल्म को एक बार जरूर देख सकते हैं। 


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