Prassthanam Movie Review: दमदार कास्ट का फायदा उठाने से चूके देवा कट्टा!

संजय दत्त के प्रोडक्शन में बनी 'प्रस्थानम' एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है। जिसमें सत्ता का लालच, आपसी मतभेद, खूनी रिश्तों में ही खूनखराबा दिखाया गया है।

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'प्रस्थानम' 2010 में रिलीज हुई तेलुगू फिल्म का हिंदी रीमेक है। साथ ही फिल्म का टाइटल भी ओरिजिनल है। फिल्म की प्रामाणिकता बरकरार रखने के लिए देवा कट्टा से ही फिल्म डायरेक्ट कराई गई है, जिन्हों तेलुगू फिल्म को भी डायरेक्ट किया था। फिल्म में संजय दत्त, मनीषा कोइराला, अली फजल अमायरा दस्तूर, जैकी श्रॉफ और सत्यजीत दुबे प्रमुख भूमिका में हैं। संजय दत्त के प्रोडक्शन में बनी 'प्रस्थानम' एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है। जिसमें सत्ता का लालच, आपसी मतभेद, खूनी रिश्तों में ही खूनखराबा दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी विधायक बलदेव प्रताप सिंह (संजय दत्त) के इर्द गिर्द घूमती है। बलदेव पिछले 25 सालों से लगातार राजनीति में अग्रसर हैं। उसके समर्थन में एक बड़ा जन समुदाय है, साथ ही उनकी पत्नी (मनीषा कोईराला) उनको हिम्मत देती है, सौतेला बेटा आयुष (अली फजल) बाप के लिए जान देने को तैयार है और सबसे खास कटप्पा की तरह वचन निभाने वाला बादशाह (जैकी श्रॉफ) है। बलदेव का एक और बेटा है विवान (सत्यजीत दुबे) जो अवारा और बिगड़ैल है। उसे सत्ता का लालच है, पर बलदेव सत्ता अपने सौतेले बेटे आयुष को सौंपना चाहता है। जिसके बाद विवान का भयानक रूप देखने को मिलता है। पर कहानी में एक दमदार ट्विस्ट तब आता है जब बादशाह आयुष को बलदेव का एक कड़वा सच बताता है। अब बादशाह के सामने ऐसी क्या मजबूरी आती है, जो अपना वचन तोड़ता है, और पिता का यह रूप देखने के बाद आयुष का क्या रिएक्शन होगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म में स्टारकास्ट दमदार है, पर डायरेक्टर इस कास्ट का सही इस्तेमाल करने में असफल रहे हैं। जैकी श्रॉफ और मनीषा कोयराला के किरदार काफी दमदार थे, पर उन्हें स्क्रीन स्पेस नहीं दिया गया। फिल्म के डायलॉग 90 के दशक की याद दिलाते हैं। संजय दत्त एक जगह फिल्म में बोलते हैं ‘डायफर और राजनेता समय समय पर बदलते रहना चाहिए’। फिल्म का फर्स्ट हाफ कास्ट को इंट्रोड्यूज करने में ही निकल जाता है। जिसके चलते आपका बोर होना लाजमी होगा।

फिल्म में कुछ जगहों पर आपको ‘बाहुबली’ फिल्म की कहानी की भी याद आएगी। क्योंकि उसमें भी विरासत के लिए भाई भाई लड़े थे और इसमें भी। फिल्म में कुछ किरदारों की जरूरत नहीं थी, जैसे अली फजल और अमायरा दस्तूर को फिल्म में बेवजह घसीटने की कोशिश की कई है। अगर कहानी में इस पर वर्कआउट किया गया होता तो फिल्म कुछ हद तक इंगेजिंग हो सकती थी।

अगर आप संजय दत्त के फैन हैं और आपको पॉलिटिकल ड्रामा, आपसी लड़ाई झगड़ा की फिल्में पसंद हैं तो एक बार आप ‘प्रस्थानम’ देख सकते हैं। नहीं तो इस फिल्म में पैसे बर्बाद करने से अच्छा, एक महीने बाद यही फिल्म आप अमेजॉन प्राइम पर भी देख सकते हैं।    

रेटिंग्स: 2.5

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