जीएसटी को एक साल पूरा- क्या सही कदम साबित हुआ जीएसटी?

30 जून 2017 की रात को देश की संसद में जीएसटी को बड़े ही धूम धाम से शुरु किया गया।

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30 जून 2017 की रात को देश की संसद में बड़े ही धूम धाम से राष्ट्रपति के हाथों जीएसटी की शुरुआत की गई। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को देश में लागू हुए आज यानी 30 जून को 1 साल पूरा हो गया। मोदी सरकार का दावा है कि देश में जटिल कर प्रणाली खत्म हो चुकी है और दर्जन भर से ज्यादा अलग-अलग तरह के करों और कई उपकरों को मिलाकर एकल कर प्रणाली बनाई गई है। लेकिन क्या वाकई में देश में 70 शाल पूरानी टैक्स व्यवस्था को खत्म करने के बाद जिस जीएसटी को 'एक देश एक टैक्स' नाम के शुरु किया गया, क्या वो वाकइ में आम लोगों की समस्या का समाधान किया? क्या जीएसटी आने के बाद व्यापारियों को इसका लाभ मिला? इसके साथ ही कई ऐसे सवाल है जिसका आज तक सीधा जवाब नहीं मिला है।

शुरुआत में ही करने पड़े कई बदलाव
जीएसटी की एक साल की यात्रा भी सुगम नहीं रही और पहले ही दिन से इसमें गड़बड़ी और समस्याएं बनी रहीं। जीएसटी शुरु करने के बाद जहां शुरुआती दौर में इसके टैक्स स्लैब को लेकर काफी विवाद हुआ तो वही सरकार ने भी समय समय पर टैक्स में आनेवाली वस्तुओं की लिस्ट में भी बदलाव किया। सरकार भी अक्सर कहती रही है कि बीएमडब्ल्यू कार और हवाई चप्पल पर एक समान कर की दर नहीं होनी चाहिए।जीएसटी में कर की छह दरें क्रमश: 5, 12, 18 और 28 फीसदी रखी गई हैं। इसके अलावा कुछ मदों पर कर की दर शून्य है तो सोने पर तीन फीसदी कर लगाया गया है।पिछले साल 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के पहले दिन से ही जीएसटी नेटवर्क पोर्टल में तकनीकी खामियां रहने से करदाताओं को इसपर पंजीकरण करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण सरकार को रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी।


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11 महीने में महंगाई दोगुनी
कुछ देशों में गुड्स एंड सर्विस टैक्स के शुरुआती महीनों में महंगाई में इजाफा हुआ था। कनाडा में 1991 में 7% की दर से जीएसटी लागू किया गया था। हालांकी आपको बता दे की भारत में सबसे ज्यादा जीएसटी 28 फिसदी है जो चिली देश के बाद सबसे ज्यादा है। कई देशों में जीएसटी के बाद महंगाई बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया को भी जीएसटी के बाद महंगाई को काबू करने के लिए कदम उठाने पड़े। भारत में जीएसटी लागू होने के समय जुलाई 2017 में खुदरा महंगाई दर 2.36% थी। एक महीने बाद अगस्त 2017 में ये दर 3.36% पहुंच गई जो 5 महीने में सबसे ज्यादा थी। जीएसटी के 11 महीने बाद मई 2018 में महंगाई दर 4.87% रही।

इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में इजाफा
जीएसटी लागू होने से पहले वित्त वर्ष 2016-17 में कुल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 17.10 लाख करोड़ रुपए और हर महीने औसतन 1 लाख करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ था। वहीं, जीएसटी के 11 महीनों यानी जुलाई 2017 से मई 2018 के बीच कुल टैक्स कलेक्शन 10.06 लाख करोड़ रुपए और हर महीने औसत कलेक्शन 91 हजार करोड़ रुपए रहा। आपको बता दे की अप्रैल 2018 में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया था।

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जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक के चार बड़े फैसले
1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटी काउंसिल के 4 बड़े फैसले लिए गए है, आपको बता दे की जिस समय जीएसटी को लागू किया गया था उस समय इस फैसलो पर कोई विचार नहीं हुआ था, बाद में जब लोगों का विरोध बढ़ा तो सरकार को इन चार मुद्दों पर फिर से फैसला लेना पड़ा।

1)नवंबर 2017 की बैठक में 213 सामानों को अधिकतम 28% जीएसटी स्लैब से निकालकर 18% के स्लैब में शामिल किया ,213 आइटम्स पर टैक्स दरों में बदलाव किया।
2)18 जनवरी 2018 को 21 सामानों पर टैक्स की दरों में बदलाव, 40 सेवाओं पर टैक्स खत्म किया।
3)एक अप्रैल 2018 को ई-बे बिल लागू किया गया, दिसंबर 2017 की बैठक में इसका फैसला लिया गया था।
4) 4 मई 2018 को कारोबारियों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी वाली रिटर्न प्रक्रिया आसान करने के फैसले पर सहमति बनी। अब महीने में तीन की बजाय एक रिटर्न भरना होगा।

सुरत कपडा व्यापारियों ने दिखाया था विरोध
आपको बता दे की जीएसटी लागू होने के बाद अगर कही इसका सबसे बड़ा विरोध देखने को मिला था तो वो था गुजरात का सूरत शहर। सुरत को कपड़ा व्यापार का हब माना जाता है। यहां के कपड़ा व्यापारियों का कहना है की जीएसटी के कारण उनको व्यापार पर असर पड़ा और उन्हे लगातार नुकसान हो रहा है।


लाख मांगों के बाद भी पेट्रोल अभी तक जीएसटी में नही
जीएसटी लागू होने के बाद से ही पेट्रोल और डीजल के दामों को जीएसटी में लाने की मांग हो रही है। पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जीएसटी में शामिल करने पर राज्यों को राजी करना, टैक्स के नुकसान के डर से राज्य इसमें हिचक रहे हैं। हालांकी केंद्र सरकार का कहना है की वो पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दारये में लाने के लिए राजी है लेकिन राज्य सरकारों ने इसका विरोध किया है।

सरकार भले ही बार-बार ये दावे करते रहे कि जीएसटी को 'वन नेशन और वन टैक्स' के तौर पर लॉन्च किया है, लेकिन सच्चाई यही है कि अभी भी कारोबारी इसे पूरी तरह अपना नहीं पाए हैं और इसके साथ ही ग्राहको को भी इसका कोई खास लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।




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