Parle-G : अर्श से फर्श तक की कहानी


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भारत इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है, लेकिन इस खबर से लोग इतना नहीं चौकें, जितना की इस खबर से कि पोपुलर बिस्किट कंपनी पारले जी (Parle G Biscuit) भी इस मंदी से प्रभावित हुई है। अभी हाल ही में पारले-जी कंपनी के अधिकारी मयंक शाह की  तरफ से यह बयान जारी किया गया कि पारले-जी को घाटा का सामना करना पड़ रहा है इसीलिए कंपनी के 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी। कंपनी का आरोप है कि मोदी सरकार द्वारा लगाये गये GST की दरों से कंपनी के प्रोडक्ट को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। जिस पारले-जी बिस्किट को हमारे दादा से लेकर पापा तक और शायद बच्चे तक इतने चावसे खाते थे आखिर क्या है उसकी हिस्ट्री, आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज उसे यह दिन देखना पड़ रहा है, आइये जानते हैं...

Parle-G का इतिहास 

बताया जाता है कि 1929 में भारत पर जब अंग्रेजों का राज था तो उस समय मुंबई के विलेपार्ले इलाके में 'पार्ले प्रोडक्ट्स' नामकी एक छोटी कंपनी अस्तित्व में आई जो टॉफियाँ और मिठाइयाँ बनाने का काम करती थीl लगभग एक दशक तक चॉकलेट और मिठाइयां बनाने के बाद कंपनी ने बिस्किट बनाना भी शुरू कर दियाl और जल्द ही इसके बिस्किट इतने फेमस हो गये कि पारले-जी का नाम देश ही नहीं विदेश में भी  हो गयाl यह बिस्किट भारत से बाहर यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, सहित अन्य कई देशों में भी उपलब्ध था।

पीले रंग का रैपर और छोटी लड़की थी पहचान
इसकी पॉपुलर्टी का आलम यह था कि पारले-जी बिस्किट शहर ही नहीं बल्कि हाई-वे किनारे के ढाबों, गांव कस्बों की चाय की दुकान पर भी आराम से बिकती नजर आ जाती थीl कई सालों तक इस बिस्किट को मोम के कागज से निर्मित सफ़ेद और पीले रंग का अति लोकप्रिय रैपर इसकी पहचान बना रहा जिस पर एक छोटी लड़की को दिखाया गया था। यही नहीं कई  नकली कंपनियां भी समान पैकेज डिजाइन और समान नाम से लेकिन खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों को बेचने का प्रयास करती रही हैं।

अभी भी कई प्रोडक्ट मार्केट में
कई लोग कहते हैं कि इसकी पॉपुलर्टी का मुख्य कारण इसका स्वाद तो था ही साथ ही इस बिस्किट की लोगों तक पहुंच और सस्ता होना भी थाl एक समय पारले-जी विश्व में सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्कुट बन गया था, हालांकि कुछ लोग इसे अभी भी मानते हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं था कि यह  भारत बिकने वाला सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्कुट था और शायद अभी भी हैl इस समय भी इस ब्रांड की अनुमानित कीमत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है और कंपनी के कुल कारोबार में इसका 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान हैl यह दीगर बात है कि इस समय पारले के कई प्रोडक्ट अभी भी बाजार में आ रहे हैंl

एक लाख से अधिक कर्मचारी हैं कार्यरत
अभी भी पारले प्रोडक्ट्स की सेल्स 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होती हैl देश भर में कंपनी के कुल 10 प्लांट हैं जिसमें करीब एक लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैl साथ ही, कंपनी के 150 से भी अधिक  थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी देश के भिन्न भिन्न हिस्सों से ऑपरेट होती हैंl कंपनी की सेल्स का आधा से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण बाजारों से आता हैl

ये तो था इसके फायदे की बात, अब आइये जानते हैं कि आखिर कंपनी को किस प्रोडक्ट पर घाटा हो रहा है...

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शहरों में भी इसके खरीददार कम नहीं हैं, लेकिन अब इसे बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट भी कमजोर डिमांड से जूझ रही हैl रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी 100 रुपये प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्किट पर GST घटाने की मांग कर रही हैl कंपनी के मुख्य अधिकारी मयंक शाह का कहना है कि अगर हमारी  इस मांग को सरकार  नहीं मानती है तो  फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ सकता है, क्योंकि सेल्स घटने से कंपनी को भारी नुकसान हो रहा हैl आपको जानकर हैरानी होगी कि घाटे के चलते 30 जुलाई 2016 को इसकी फैक्ट्री को बंद कर दिया गया थाl   

'GST से हो रहा है घाटा'

शाह के अनुसार GST लागू होने से पहले 100 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले बिस्किट पर 12 फीसदी टैक्स लगता थाl इसीलिए कंपनी उम्मीद लगा रही थी कि GST में आने के बाद टैक्स की दरें 5 फीसदी तक आ सकती है, लेकिन सरकार ने जब GST लागू किया तो सभी बिस्किटों को 18 फीसदी स्लैब में डाला गया तो ऐसे में प्रोडक्ट की लागत बढ़ गईl लिहाजा दाम बढ़ाना ही एकमात्र जरिया रह गयाl इससे कंपनी की बिक्री पर निगेटिव असर पड़ाl  पारले को भी इस दौरान 5 फीसदी दाम बढ़ाने पड़े है, लेकिन सेल्स घट रही हैl

मोदी सरकार की बढ़ सकती है चिंता 
पारले की इस घोषणा से मोदी सरकार की चिंता बढ़ गयी होगी, क्योंकि मोदी सरकार जिस तरह से अपने पहले कार्यकाल में जॉब पैदा करने में नाकाम हुई थी उसे लेकर काफी आलोचना की गयी थी, यही नहीं इसी जॉब को समायोजित करने के लिए मोदी सरकार ने कई योजनाएं भी निकाली हैं, इसके बाद भी कई सेक्टर मंदी का सामना कर रहे हैंl इसमें टेक्सटाइल इंडस्ट्री प्रमुख हैं जहां करीब 50 लाख लोग बेरोजगार हो गयेl

वैश्विक युद्ध शुरू?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच पिछले दिनों जो ट्रेड वॉर शुरू हुआ था उसने धीमे-धीमे पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिया है। जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था की बात तो देश में इस वक्त कोई बड़ी आर्थिक मंदी जैसे बुरे हालात नहीं हैं लेकिन मार्केट में स्लो डाउन है जिसको जल्दी ही काबू नहीं किया गया तो अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। अब अगर जल्द ही मोदी सरकार ने कुछ प्रभावकारी उपाय नहीं किया तो आने वाला समय और भी बुरा हो सकता हैl


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