नायर अस्पताल MRI मामला: 'बीएमसी दे 10 लाख', कोर्ट ने दिया आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अकिल कुरेशी और न्यायमूर्ति शाहरुख काथावाला की बेंच ने फैलसा सुनाते हुए कहा कि राजेश के परिवार वालों को यह पैसा 6 हफ्ते के अंदर दिए जाएं साथ ही इस पैसे को 5 साल के लिए जमा कराया जाए।

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को मृतक राजेश मारू के घर वालों को 10 लाख रूपये का मुआवजा देने का आदेश  सुनाया है। पिछले साल नायर अस्पताल की लापरवाही से राजेश मारू नामके एक शख्स की मौत हो गयी थी, जिसके बाद परिजनों ने मुआवजे की मांग की, मामला कोर्ट में जाने के बाद कोर्ट ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया।

बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अकिल कुरेशी और न्यायमूर्ति शाहरुख काथावाला की बेंच ने फैलसा सुनाते हुए कहा कि राजेश के परिवार वालों को यह पैसा 6 हफ्ते के अंदर दिए जाएं साथ ही इस पैसे को 5 साल के लिए जमा कराया जाए।

क्या था मामला?

राजेश मारू की बहन की सास लक्ष्मी की तबियत खराब थी जो कि नायर अस्पताल में भर्ती थी। राजेश उन्हीं से मिलने हॉस्पिटल गया था। डॉक्टरों ने मरीज लझ्मी का एमआरआई करवाने के लिए कहा। साथ में राजेश भी था। आरोप है कि एमआरआई रूम के बाहर अस्पताल के वॉर्ड बॉय ने शरीर पर से घड़ी और सोने की चैन तो उतरवा ली लेकिन मरीज को दिया जा रहा ऑक्सीजन सिलेंडर अंदर ले जाने को कहा।

राजेश के जीजा हरीश के मुताबिक उन्होंने विरोध किया लेकिन साथ में आए वॉर्ड बॉय ने बताया कि अभी मशीन बंद है। उसके बाद जैसे ही राजेश कमरे में अंदर गया मशीन ने सिलेंडर को अपनी तरफ खींचा। सिलेंडर को पकड़े हुए राजेश भी मशीन में चला गया। तभी दबाव से सिलेंडर का ढक्कन खुल गया और पूरी गैस मुंह, राजेश के पेट मे चली गई। हरीश का कहना है कि वॉर्ड बॉय के साथ मिलकर हमने तुरंत उसे खींचना चाहा। उसे खींच भी लिया लेकिन तब तक वो उसकी आंखें बाहर आ चुकी थीं। उसकी मौत 2 मिनट के अंदर हो गई।

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राजेश की मौत के बाद उसकी बहन लीना और मां-बाप ने मुआवजे की मांग की, लेकिन बीएमसी ने मुआवजा देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि यह स्पष्ट नहीं है कि राजेश मशीन के अंदर कैसे गया।

इसके बाद राजेश के परिजनों ने कोर्ट का सहारा लिया, मामले की सुनवाई में कोर्ट ने बीएमसी की दलील को मानने से मना करते हुए इसे अस्पताल की लापरवाही माना। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज की गयी FIR, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वार्ड बॉय सहित 2 अन्य कर्मचारियों के बयान और बीएमसी द्वारा कोर्ट में दाखिल की गयी एफिडेविट को आधार मानते हुए अपना फैसला सुनाया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हम याचिका पर अंतिम सुनवाई कर रहे हैं क्योंकि मामले की जांच पुलिस कर रही है। हालांकि, पीठ ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बीएमसी को राजेश के परिवार को अंतरिम मुआवजा देना होगा।

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