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मुंबई में रविवार को गोरेगांव में एक निर्माणाधीन दुमंजिला इमारत गिरने से 3 की मौत हो गयी और 7 लोग घायल हो गये। यह कोई पहला मामला नहीं है कि इमारत गिरने से लोगों की जान गयी है। एक आरटीआई के मुताबिक़ पिछले 5 सालों में 2704 की संख्या में निर्माण कार्य के दौरान हादसा हुआ जिसमें 234 लोगों की मौत हुई है। आंकड़े देखने के बाद यह सवाल पैदा होता है कि नियमों और कायदा कानून होने के बाद भी आखिर कैसे इतने हादसे होते हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने आरटीआई के तहत बीएमसी के आपदा प्रबंधन विभाग से यह जानकारी मांगी थी कि साल 2013 से लेकर 2018 तक कितने हादसे निर्माणकार्यों के दौरान हुए और इस हादसे में अब तक कितनो लोगों की मौतें हुई हैं और कितने लोग जख्मी हुए हैं?

बीएमसी की तरफ से जानकारी के रूप में जो आंकडें उपलब्ध कराये गये वे वाकई में काफी चौकानें वाले हैं। जवाब में बताया गया है कि मुंबई में साल 2013 से जुलाई 2018 तक बिल्डिंग अथवा सिंगल घर गिरने की कुल 2704 घटनाएं घटी, जिसमें से 234 लोगों की मौत हुई और 840 लोग जख्मी हुए हैं।

शकील का कहना है कि यह आंकडें इतने डरावने हैं कि, इतनी मौतें तो आतंकवादी घटनाओं के बाद भी नहीं हुई हैं जितनी मौतें सिस्टम की लापरवाही से हुई है। सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते है यह हादसे होते हैं। अब शकील ने इन हादसों को रोकने के लिए बीएमसी कमिश्नर अजोय मेहता और मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रभात रहांगदले पत्र लिख कर उनसे जवाब मांगा है।

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