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मेट्रो काम के चलते पहले भी कई बार फूट चुकी है पानी की पाइप

साल 2017 से लेकर 2019 इन तीन सालों में मुंबई के कई हिस्सों में जैसे सिद्धार्थ कॉलेज, बांद्रा, गोरेगांव, मलाड, कांदिवली, बोरीवली, बोरिवली, दहिसर, परेल, वर्ली में पानी की पाइप लाइन फूटने की घटना सामने आ चुकी है।

मेट्रो काम के चलते पहले भी कई बार फूट चुकी है पानी की पाइप
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मेट्रो का काम अब बीएमसी और मुंबईकरों के लिए सिरदर्द साबित होता जा रहा है गुरूवार को मेट्रो के काम के कारण एक पानी सप्लाई करने वाली एक पानी की पाइप फूट गयी, जिसकी मरम्मत के लिए बीएमसी को तीन दिन लग गये, और इन तीनों दिनों में मुंबई के उपनगर के कई इलाकों में पानी नहीं आया, जिससे लाखों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा यह कोई पहली बात नहीं है कि मेट्रो के काम के चलते पहली बार पानी की पाइप लाइन फूटी हो, इसके पहले भी लोगों को इसी तरह से कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है

आपको बता दें कि इस समय कोलाबा से दहिसर-ठाणे तक मेट्रो का काम चल रहा है। पिछले 3 वर्षों के दौरान, मेट्रो के लिए खुदाई से 25 से 30 पानी की सप्लाई करने वाली बड़ी पाइप लाइन फूट चुकी है। पिछले हफ्ते गुरूवार को भी वेरावली में 1800 मि.मी पानी की पाइप लाइन टूट जाने के कारण हजारों लीटर पानी बर्बाद हो गया था, और उपनगर के कई इलाकों में पानी 3 दिन तक नहीं आया, जिससे लाखों नागरिक हलकान रहें।

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मेट्रो के इस काम के चलते बीएमसी को भी परेशानी होती है, पाइप की मरम्मत में लगने वाला समय और पैसा खर्च तो होता ही है साथ ही बीएमसी को हजारों लोगो की शिकायतों का सामना भी करना पड़ता है। इसीलिए   बीएमसी ने पहले ही इस बात का निर्णय किया था कि मेट्रो से हुए नुकसान की भरपाई मेट्रो से ही  वसूला जाएगा

बताया जाता है कि मेट्रो का कम शुरू होने के बाद BMC ने MMRDA के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मेट्रो के अधिकारियों को BMC के अधिकारियों द्वारा मुंबई और उपनगरीय इलाकों में फैले पानी के पाइप के नेटवर्क का एक नक्शा दिया था। बीएमसी ने कहा था कि, मेट्रो जो भी खुदाई का कार्य करेगी पहले वह सुनिश्चित कर ले कि वहां पानी की पाइप मौजूद है या नहीं।

लेकिन साल 2017 से लेकर 2019 इन तीन सालों में मुंबई के कई हिस्सों में जैसे सिद्धार्थ कॉलेज, बांद्रा, गोरेगांव, मलाड, कांदिवली, बोरीवली, बोरिवली, दहिसर, परेल, वर्ली में पानी की पाइप लाइन फूटने की घटना सामने आ चुकी है

 बीएमसी का यह भी कहना है कि मेट्रो के काम से जब पाइप लाइन फूट जाती है तब कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बंद हो जाती है। लेकिन इस बात का पता बीएमसी को तब चलता है जब नागरिक शिकायत करते हैं कि उनके इलाके में पानी नहीं आ रहा है, जबकि इस बात की सूचना मेट्रो द्वारा नहीं दी जाती है

मेट्रो के लिए जमीन खोदते समय पहले तीन मीटर गहरे तक ट्रायल लिया जाता है। जब तक पानी की पाइपलाइन नहीं होती, तब तक मशीन खुदाई करना शुरू करती रहती है। हालांकि, कई पाइप तीन मीटर से भी नीचे हैं। मेट्रो से ही पाइप के नुक्सान और बर्बाद हुए पानी का खर्चा बीएमसी जोड़ कर मेट्रो से लेगी अब वेरावली में भी बीएमसी हुए नुकसान का आंकलन कर इसकी भरपाई मेट्रो से कराएगी

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