CST ब्रिज हादसा: इंजीनियर की गिरफ्तारी के विरोध में बीएमसी के 42 इंजीनियरों ने सामूहिक छुट्टी पर जाने का किया फैसला

बुधवार को वर्ली स्थित बीएमसी इंजीनियर हब के बाहर कई इंजीनियरों ने इन सभी गिरफ्तारियों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इन इंजीनियरों का कहना है कि इस मामले में इन्हें बली का बकरा बनाया जा रहा है।

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सीएसटी के हिमालय ब्रिज हादसे में सोमवार को ही सब इंजीनियर शीतला प्रसाद कोरी की गिरफ्तारी हुई है। इस मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। एक के एक जिस तरह से इंजीनियरों की गिरफ्तारी हो रही है इसके विरोध में बीएमसी के पुल विभाग के लगभग 42 इंजीनियरों ने सामूहिक रूप से गुरूवार से 15 दिन की छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। अगर ऐसा होता है तो कई ब्रिज के काम प्रभावित हो सकते हैं  क्योंकि पूरे मुंबई में पुलों और एफओबी के कई छोटे और बड़े मरम्मत कार्य चल रहे हैं।

बुधवार को वर्ली स्थित बीएमसी इंजीनियर हब के बाहर कई इंजीनियरों ने इन सभी गिरफ्तारियों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इन इंजीनियरों का कहना है कि इस मामले में इन्हें बली का बकरा बनाया जा रहा है।

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बीएमसी इंजीनियर्स यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष साईनाथ राजाध्याक्ष ने कोरी की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए कहा कि, यह उचित नहीं है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने से पहले इंजीनियरों को गिरफ्तार किया जा रहा है। सचिव, पीडब्ल्यूडी की देखरेख में समिति की अंतिम रिपोर्ट को ही तय करनी चाहिए थी कि उन्होंने गलती की है या नहीं। इस मामले में केवल ठेकेदारों को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए क्योंकि उनके पास संरचनात्मक ऑडिट की विशेषज्ञता है और इंजीनियरों की नहीं। इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया जाता है और हम इस गिरफ्तारी की निंदा करते हैं।

राजाध्याक्ष  ने आगे कहा कि, "हम बुधवार सुबह  बीएमसी कमिश्नर अजॉय मेहता से भी इस मामले में मुलाकाती की और इस गिरफ्तारी को लेकर असंतोष व्यक्त किया।"

इस बीच, इंजीनियरों यूनियनों आगे की कार्रवाई के बारे में चर्चा करने के लिए गुरुवार को परेल में शिरोडकर स्कूल में एक बैठक आयोजित करेंगे। राज्याक्ष ने कहा, "हम बुधवार सुबह नगर निगम आयुक्त अजॉय मेहता से मिले थे और पूर्व मुख्य अभियंता की गिरफ्तारी पर असंतोष व्यक्त किया था।"

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नगरपालिका इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखदेव काशिद ने कहा कि पुलिस को पूछताछ के बजाय बीएमसी की आंतरिक जांच करनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर परेल में 9 मई को 1000 से अधिक इंजीनियर भाग लेंगे और आगे इस कार्रवाई पर फैसला करेंगे।

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