पश्चिम रेलवे ने कराई 718 लापता बच्चों की घर वापसी

इन लापता बच्चों में ऐसे बच्चे शामिल थे जिन्हें तस्करी से छुड़ाया गया था, घर से भागे हुए थे, या स्टेशनों पर अपने घर वालों से बिछड़ गये थे या फिर जो रेलवे स्टेशन को ही अपना घर बना लिए थे।

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पश्चिम रेलवे ने 718 बच्चों की घर वापसी कराई है। इसका मतलब पश्चिम रेलवे ने लापता हुए कुल 718 बच्चों को उनके घर भेजा है। इन लापता बच्चों में ऐसे बच्चे शामिल थे जिन्हें तस्करी से छुड़ाया गया था, घर से भागे हुए थे, या  स्टेशनों पर अपने घर वालों से बिछड़ गये थे या फिर जो रेलवे स्टेशन को ही अपना घर बना लिए थे। पश्चिम रेलवे के इस काम में आरपीएफ, राज्य पुलिस, समाजसेवी संस्था जैसे लोग भी शामिल हैं। यह आंकडें एक साल का है यानी मार्च 2018 से मार्च 2019 तक का। यही नहीं  1 अप्रैल से 20 मई के बीच 66 लापता बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया।  

चाइल्ड हेल्पलाइन की स्थापना
बताया जाता है कि पश्चिम रेलवे ने जो चाइल्ड हेल्पलाइन बनाई है उससे इन बच्चों को ढूंढने में काफी सहायता मिली। इस चाइल्ड हेल्पलाइन की ही सहायता से मुंबई सेंट्रल विभाग से 381, बड़ौदा से 71, अहमदाबाद से 44, रतलाम से 174,  राजकोटसे 23 और भावनगर विभागा से 25 बच्चों की घर वापसी हुई।


यही नहीं पश्चिम रेलवे ने चाइल्ड हल्प लाइन की तरफ से एक मुहीम भी शुरू की थी इस मुहीम के अंतर्गत लापता बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था साथ ही इस हेल्प लाइन के माध्यम से बच्चों की तस्करी करने वाले गैंग की चंगुल में फंसे बच्चों को छुड़ाना और उन्हें उनके घर तक पहुंचना था

पश्चिम रेलवे ने इन हेल्प लाइन की स्थापना मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस, सूरत, बड़ौदा, अहमदाबाद, रतलाम और राजकोट जैसे स्टेशनों पर की है साथ ही ऐसे बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने महिला और बाल कल्याण मत्रालय की मदद भी ले रहा है

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