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15 हो या फिर 26 जनवरी, लोग जोश में देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर तिरंगा खरीदते हैं, उसे अपनी गाड़ी में या घर में या फिर अपने बच्चों को खरीद कर देते हैं। साथ ही प्लास्टिक का छोटा सा तिरंगा खरीद कर लोग अपनी शर्ट में भी लगाते हैं। यह देशभक्ति की भावना मात्र एक ही दिन रहती है और जैसे ही शाम या रात होती लोग तिरंगा अपने घर के बाहर फेंक देते हैं, और फिर यही तिरंगा लोगों की चपल्लों के नीचे कुचला जाता है। जिससे तिरंगे का अपमान तो होता ही है साथ ही देश पर शहीद होने वाले शहीदों का भी अपमान होता है।

इसे देखते हुए अनिकेत भंकाल नामके एक शख्स ने इसके प्रति लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। उन्होने 2012 में 'केयर फाउंडेशन' नाम के एक एनजीओ की स्थापना की और हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन 'राष्ट्रध्वज सम्मान रैली' का आयोजन कर लोगों को जागरूक तो करते ही हैं साथ ही सभी लोग सड़कों पर पड़े तिरंगे को उठा कर जमा करते हैं और उसे किसी अच्छी जगह गाड़ देते हैं। इस रैली में 3 साल के बच्चे से लेकर कॉलेज के छात्र तक शामिल होते हैं।

यह रैली बांद्रा से होकर खार तक जाती है जो सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक चलती है। यही नहीं बच्चों के हाथों में संदेश देते तख्तियां भी होती है।

2012 में हमने पहली रैली का आयोजन किया था। उस समय हमने 1200 झंडा एकत्रित किया था। स्वतंत्रता दिवस पर लोग तिरंगे का सम्मान मात्र 2 घंटे के लिए ही करते हैं इसके बाद उसे सड़कों पर फेंक देते हैं। यह तिरंगा कब और किस अवस्था में सड़क पर पड़ा रहता है इस पर कोई भी ध्यान नहीं देता। 

अनिकेत भंकाळ, अध्यक्ष, केयर फाऊंडेशन,

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