खतरनाक इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट एक महीने के अंदर करना अनिवार्य


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बीएमसी ने धोखादायक बिल्डिंगो को लेकर एक नीति तय की है जिसके अनुसार अब जो बिल्डिंग धोखादायक घोषित होती है तो अगर उसमें रहने वाले लोग इसका 15  दिन के अंदर इसका विरोध करते हैं तो उन बिल्डिंगो का  स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट पेश करना होगा। यह रिपोर्ट 30 दिन के अंदर पेश करना अनिवार्य होगा।

मुंबई में ऐसी कई इमारतें हैं जो खरनाक घोषित हो चुकी हैं फिर भी लोग उसमें रह रहे हैं, इसीलिए बीएमसी ने ऐसी इमारतों के लिए अब नीति तय की है। इस नीति को बीएमसी कमिश्नर अजोय मेहता की भी मंजूरी मिल चौकी है। 

इस नीति में, कौन सी इमारत खतरनाक होने की श्रेणी में आ चुकी है इस प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। साथ ही इस नीति के तहत यह प्रक्रिया और भी पारदर्शी हो जाएगी। इसके अंतर्गत बीएमसी को बिल्डींग से संबंधित उठाये गए हर कदम की जानकारी बिल्डिंग के मालिकों और उनमे रहने वालों को देनी होगी।

अतिक्रमण निरोधी विभाग की उपायुक्त (विशेष) निधी चौधरी ने कहा कि इसके पहले धोखादायक इमारतों के संदर्भ में मात्र एक समिति ही बनी थी जहां लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते थे लेकिन अब प्राइवेट इमारतों के लिए 4, बीएमसी की इमारतों के लिए 1 समिति को मिलाकर कुल 5 समितियों की स्थापना की गयी है।

यह नीति सरकारी और प्राइवेट दोंनो इमारतों पर लागू होगी। इसके अलावा, उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार, म्हाडा आदि के स्वामित्व वाली खतरनाक इमारतों से संबंधित एक अलग नीति तैयार की जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस बारे में बीएमसी की वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध कराई गयी है कोई भी व्यक्ति इस बारे में 10 दिसंबर तक सलाह भेज सकता है।





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