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मल्टीप्लेक्स में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं है? 5 रूपये का पॉपकॉर्न 250 रूपये में बेचने का अधिकार उन्हें किसने दिया?  जैसे सवाल बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा। इस संदर्भ में दायर की गयी याचिका पर सुनवाई करते समय कोर्ट ने सरकार को फटकार भी लगाई। इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति रणजीत मोरे और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ कर रही थी।


सुरक्षा के नाम पर कमाई 
इस बाबत एक जनहित याचिका जैनेंद्र बक्शी ने अपने वकील आदित्य प्रताप के जरिए दायर की है। इस याचिका में सिनेमा थिएटर और मल्टीप्लेक्स में खाद्य पदार्थ ले जाने पर प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। याचिका ने बाहर से लाए गए खाद्य वस्तुओं को अपने साथ अंदर ले जाने की मांग की गयी है। याचिका में आगे कहा गया है कि थियटरों में खाने-पीने की चीजें ले जाना मना है। लोगों को मजबूरन खाने पीने का सामान ऊंचे दामों में खरीदना पड़ता है। इसकी कहीं कोई सुनवाई भी नहीं है। ग्राहकों से सुरक्षा के नाम पर खाद्य पदार्थ निकलवा लेने वाले मल्टीप्लेक्स के अंदर बेहद ही ऊंचे दामों पर खाद्य वस्तुएं बेचीं जाती हैं।

 
'ताज में चाय के दाम क्यों नहीं'
इस सुनवाई में थियेटर मालिकों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मल्टीप्लेक्स में ग्राहकों को सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। लक्जरी सुविधा देना हमारा काम है। ताज या ओबेरॉय होटल में जाकर आप चाय की कीमतें इतनी ऊंची क्यों है, नहीं पूछ सकते?

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