शिवाजी स्मारक पर राज्य सरकार को राहत, स्टे लगाने से हाई कोर्ट ने किया इनकार

राज्य सरकार के इस योजना के खिलाफ पर्यावरण के हित में काम करने वाली कई संस्थाएं और पर्यावरणविद आ गए हैं। यही नहीं खुद मच्छी मार कर अपना जीवन यापन करने वाले कोली समुदाय के लोग भी इस योजना के खिलाफ हैं।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसके द्वारा शिवाजी स्मारक के काम पर स्टे लगाने की मांग की गयी थी। इस याचिका के खारिज हो जाने के बाद राज्य सरकार को राहत तो मिली ही साथ ही अब मुंबई में अरब सागर के निकट शिवाजी का स्मारक बनने का रास्ता साफ हो गया। 


'स्मारक पर्यावरण के खिलाफ'

आपको बता दें कि राज्य सरकार 3600 करोड़ रुपए खर्च करके शिवाजी का दुनिया का सबसे ऊंचा स्मारक बनवा रही है। इस काम के लिए L&T कंपनी को ठेका दिया गया है। लेकिन राज्य सरकार के इस योजना के खिलाफ पर्यावरण के हित में काम करने वाली कई संस्थाएं और पर्यावरणविद आ गए हैं। यही नहीं खुद मच्छी मार कर अपना जीवन यापन करने वाले कोली समुदाय के लोग भी इस योजना के खिलाफ हैं।

 यही नहीं इस प्रस्ताव के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसके काम पर स्टे लगाने की मांग की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि राज्य में सूखे को देखते हुए स्मारक पर इतना पैसा खर्च करना उचित नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया था कि इस प्रस्ताव को पास करते समय मच्छीमारों के हितों को अनदेखा किया गया है।


सरकार ने दी सफाई 

इस स्मारक के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल होने के बाद कोर्ट ने सभी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ करने का निर्णय लिया। याचिका पर सुनवाई करते समय राज्य सरकार ने अपना पक्ष कोर्ट में रखते हुए बताया कि सभी प्रकार की आवश्यक मंजूरियां ले ली गयी हैं। साथ ही राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि पर्यटकों के द्वारा ही इस स्मारक की लागत को वसूला जाएगा। 

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