CST फुट ओवर ब्रिज हादसा: 2 करोड़ में तैयार हुई थी कई गलतियों वाली ऑडिट रिपोर्ट

ऑडिट रिपोर्ट में ब्रिज के निर्माण का साल 1998 में होना बताया गया था जबकि ऐसे कई सबूत और गवाह है जो बताते हैं कि इस ब्रिज का निर्माण 1984-1986 के बीच हुआ था। इस हिसाब से ऑडिट की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े होते हैं।

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सीएसटी FOB हादसे को दो दिन बीत गए हैं लेकिन इस मामले में कुछ लोगों को निलंबित करने के अलावा और कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामला कुछ आगे नहीं बढ़ा। साथ ही जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों और कंपनियों द्वारा की गई लापरवाही भी सामने आ रही है। शुरूआती रिपोर्ट में इस ब्रिज के गिरने के कुछ मुख्य बिंदु बताए गए हैं... 

साल 2012-14 में इस ब्रिज की रिपेयरिंग के लिए जो ठेका दिया गया था, उस समय इस ब्रिज के स्ट्रक्चर की मरम्मत की गई थी। उस दौरान जो स्टील की चद्दरें खराब हो गयीं थीं उन्हीं के ऊपर ही नयी चद्दरों को बिछा दी गयीं। जिससे इस ब्रिज का वजन काफी बढ़ गया। इसीलिए मरम्मत के छह साल में ही यह ब्रिज गिर पड़ा।

साल 2016 में डी.डी. देसाई असोसिएटेड इंजिनियरिंग कंसल्टेंट की एक फर्म ने इस ब्रिज के स्ट्रक्चर का ऑडिट किया था। ऑडिट रिपोर्ट में ब्रिज के निर्माण का साल 1998 में होना बताया गया था जबकि ऐसे कई सबूत और गवाह है जो बताते हैं कि इस ब्रिज का निर्माण 1984-1986 के बीच हुआ था। इस हिसाब से ऑडिट की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े होते हैं।

इसके अलावा जांच में यह बात भी सामने आई कि ऑडिट रिपोर्ट में और भी कई गलतियां थीं, जैसे कि इस ब्रिज को सेफ कहा गया था, अगर ब्रिज सेफ था तो फिर गिरा कैसे? और ब्रिज निर्माण के दौरान जिन इंजीनियरों को नियुक्त किया गया था उन्होंने भी अपने काम को सही तरीके से अंजाम नहीं दिया था, अगर उन्होने अपना काम सही से किया होता तो यह हादसा नहीं घटित होता। जबकि इस काम के लिए ऑडिट करने वाली कंपनी ने 2 करोड़ रूपये लिए थे।

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