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MDH मसाले वाले 'दादाजी' धर्मपाल गुलाटी का निधन

धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का गुरुवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 98 साल के थे। उन्होंने दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल में सुबह 6 बजे आखिरी सांस ली।

MDH मसाले वाले 'दादाजी' धर्मपाल गुलाटी का निधन
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भारत ही नहीं देश विदेश तक में अपनी पहचान बनाने वाला MDH मसाला के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का गुरुवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 98 साल के थे। उन्होंने दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल में सुबह 6 बजे आखिरी सांस ली। 

मसाला किंग (masala king) के नाम से मशहूर धर्मपाल गुलाटी ने पूरी दूनिया में अपने मसाले के साम्राज्य को फैलाया था। बताया जाता है कि, गुलाटी ने दिल्ली में कभी एक छोटी सी दूकान से मसालों का कारोबार शुरू किया था, आज उनका साम्राज्य 1500 करोड़ से लेकर 2000 करोड़ तक हो गया है।

आइए जानते हैं उनके जीवन सफर के बारे में..

साल 1923 पाकिस्तान (pakistan) के सियालकोट में जन्मे गुलाटी का परिवार पाकिस्तान में भी अपने मसालों के व्यापार के लिए जाना जाता था। यह इनका पारिवारिक बिजनस है। धर्मपाल का मन पढ़ाई लिखाई में नहीं लगता था। मात्र 5 वी कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पढ़ना लिखना छोड़ दिया और और पिता के साथ छोटा सा व्यापार शुरू कर दिया। इस बीच उन्होंने साबुन कपड़े, चावल सहित अन्य वस्तुओं का भी कारोबार किया लेकिन कोई भी व्यापार नहीं चल पाया। और फिर वे अपने पारिवारिक कारोबार मसालों के व्यापार में आ गए।

साल 1919 में ही इनके पिता चुन्नी लाल ने सियालकोट में एमडीएच (mdh) मसाले की स्थापना की थी। उस समय चुन्नीलाल मसालों की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। जल्द ही लोग उन्हें ‘डेगी मिर्च' वाले के नाम से लोग जानने लगे। उनकी दूकान महाशियां दी हट्टी (एमडीएच) काफी फेमस हो गयीं और वे देश भर में मसालों के मैन्युफैक्चर, डिस्ट्रिब्यूटर और एक्सपोर्टर बन गये।

और उसी समय देश का बंटवारा हो गया। और गुलाटी परिवार भारत आ गया। गुलाटी परिवार 27 सितम्बर 1947 को दिल्ली पहुँचा। उन दिनों धर्मपाल गुलाटी की जेब में महज 1500 रुपये ही थे। इन पैसों से उन्होंने 650 रुपये का टांगा खरीदा और वे न्यू दिल्ली स्टेशन से लेकर कुतब रोड और तांगा चला कर मसाला बेचने लगे। लेकिन थोड़े समय बाद उन्होंने दिल्ली के करोल बाग इलाके में एक छोटी से दुकान खरीद ली और वहीँ से अपना कारोबार शुरू किया। उस दुकान का नाम उन्होंने 

'महाशियां दी हट्टी ऑफ सियालकोट (डेगी मिर्च वाले)’ रखा। इसके बाद उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। आज महाशियां दी हट्टी (एमडीएच) देश में मसालों का बड़ा ब्रांड है। वह मसालों के मैन्युफैक्चर, डिस्ट्रिब्यूटर और एक्सपोर्टर हैं।

MDH की आज भारत में 15 से अधिक मसालों की कंपनियां हैं।  एमडीएच में एक हजार से अधिक आपूर्तिकर्ताओं और 4 लाख थोक विक्रेताओं का एक विशाल नेटवर्क है। इनका व्यापार संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जापान, यूएई, इंग्लैंड, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया और सऊदी अरब जैसे देशों में 62 से अधिक उत्पाद बेचे जाते हैं।

चुन्नीलाल गुलाटी के अथक प्रयासों की बदौलत एमडीएच ने मसाला बाजार में एक अलग पहचान बनाई है।  महाशय धर्मपाल गुलाटी के पुत्र राजीव गुलाटी यानी तीसरी पीढ़ी अब इस व्यवसाय को आगे ले जा रही है। साल 2019 में, धर्मपाल गुलाटी को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।  गुलाटी अपनी व्यक्तिगत आय का 90 प्रतिशत से अधिक दान कर देते थे।

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