जो इमारत गिरी वह अवैध थी म्हाडा की नहीं, म्हाडा ने किया स्पष्ट

म्हाडा के मुताबिक़ जो इमारत उपकर प्राप्त नहीं है उसके लिए मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होता है।

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मुंबई के डोंगरी में बिल्डिंग गिरने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है साथ ही कई लोग घायल भी हैं। लोगों की मानें तो मौत का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। इस बिल्डिंग को लेकर म्हाडा ने कहा कि यह बिल्डिंग म्हाडा के अंतर्गत नहीं आती। म्हाडा की मानें तो केसरबाई नामकी यह बिल्डिंग अवैध रूप से बनी थी, जबकि इसके बगल में बनी एक और बिल्डिंग केसरबाई 1 म्हाडा के तहत आती है। आपको बता दें कि मंगलवार को सुबह 11 बजे के आसपास मुंबई के डोंगरी में केसरबाई नामकी बिल्डिंग गिर पड़ी थी। शुरू में यह बात फैली की यह बिल्डिंग म्हाडा की थी, लेकिन बाद में इसका खंडन म्हाडा ने किया।    

                   

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क्या कहा म्हाडा ने?

म्हाडा के मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड ने कहा कि 25/C केसरबाई बिल्डिंग एक उपकार प्राप्त इमारत है जो गिरी नहीं है बल्कि अभी भी खड़ी है। म्हाडा के अनुसार इस इमारत में रहने वाले लोगों को पिछले साल ही बिल्डिंग खाली करने का नोटिस दे दिया गया था, जिसके बाद से बिल्डिग खाली ही पड़ी थी। जबकि जो इमारत गिरी है उसे इसी बिल्डिग से सटा कर अवैध रूप से बनाया गया था, और वही अवैध रूप से बना हुआ हिस्सा ही गिरा है। म्हाडा के मुताबिक़ जो इमारत उपकर प्राप्त नहीं है उसके लिए मरम्मत और पुनर्निर्माण बोर्ड किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होता है।

गौरतलब है कि जब यह इमारत गिरी तो सभी ने इसे म्हाडा की बिल्डिंग करार दे दिया और चौतरफा म्हाडा की आलोचना होने लगी। इसके बाद म्हाडा ने बचाव करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि जो  इमारत गिरी वह म्हाडा की नहीं थी बल्कि उसे अवैध रूप से बनाया गया था।

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