'एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लिए मलबे में दबी थी, दोनों मर चुके थे'

    Ghatkopar
    'एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लिए मलबे में दबी थी, दोनों मर चुके थे'
    मुंबई  -  

    'मेरा हाथ छोड़ पूरा शरीर मलबे में दबा था। हिल भी नहीं पा रही थी। किसी तरह से मैंने पूरी ताकत के साथ अपने आंखों के सामने से मिट्टी हटाई तो एक महिला दिखी जो अपने एक छोटे बच्चे को गोद में लिए हुई थी। दोनों मलबे में दबे थे या शायद उनकी भी मौत हो चुकी थी। मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था, मैंने किसी तरह से हिम्मत करके अपने शरीर को हिलाना डुलाना शुरू किया और शरीर पर से मिट्टी को हटाने का प्रयास करने लगी। धीरे-धीरे आवाज देकर मैंने लोगों को बुलाने का प्रयास किया। बचावदल ने मेरी आवाज सुनी और मुझे बाहर निकाला'।

    यह प्रत्यक्ष अनुभव बयां किया है 20 वर्षीय लड़की वर्षा सकपाल ने। जो खुद घाटकोपर में ढही इमारत की चपेट में आ गई थी। लेकिन इसे वर्षा का अदम्य साहस ही कहेंगे जो कि वर्षा का मौत के मुंह से खींच लाया। जख्मी हालत में वर्षा को अस्पताल में दाखिल कराया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है। उसके सिर में चोट आई है, उसे 5 टांके लगे हैं। लेकिन वर्षा की स्थिति अब स्थिर है।

    सोमैया कॉलेज में पढ़ने वाली वर्षा सकपाल ने इसी साल 15वीं का एक्जाम दिया है और रिजल्ट आने का इंतजार कर रही है। कुछ काम नहीं था करने को इसीलिए वर्षा ने अपनी ही बिल्डिंग में स्थित अस्पताल में बतौर एकाऊटेंट काम करने लगी। वर्षा जिस अस्पताल में काम करती है यह अस्पताल उसी शिवसेना नेता 'सितप' का है, जिसे इस सारी घटनाओं का जिम्मेदार बताया जा रहा है। 

    वर्षा घटना वाले दिन को याद करते हुए बताती है कि वह अस्पताल में ही थी। उसके सहयोगी  ने उसे बताया कि कुछ गिरा है शायद , कहकर देखने के लिए वह बिल्डिंग के बाहर आ गया। वर्षा ने बताया कि उसे भी दो बार अजीब तरह की आवाज सुनाई दी, लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया। वर्षा ने बताया कि ऐसी आवाजें अक्सर आती थी। लेकिन एकाएक बिल्डिंग हिलने लगी। जब वर्षा बाहर जाने के लिए जैसे ही सीढियों तक पहुंची बिल्डिंग भर भराकर गिर पड़ी। बकौल वर्षा मात्र 3 से 4 सेकंड में सब कुछ खत्म हो गया। एक इमारत मलबे में तब्दील हो चुकी थी।


    उस मंजर को याद करते हुए मुझे अभी भी डर लगता है। जब मुझे लगा कि मलबे में मैं भी दब चुकी हूँ तो मैंने अपना एक हाथ बहार निकाला बचाव दल को आवाज देने लगी। बाहर आने के बाद मैंने इसकी सूचना अपने पिता को दी। उन्होंने तुरंत आकर मुझे राजावाड़ी अस्पताल में दाखिल कराया। अब मैं ठीक हूं।

    वर्षा सकपाल, मलबे से जख्मी हुई लड़की


    गौरतलब है कि 25 जुलाई को सुबह 10 बजे के करीब घाटकोपर में साईं दर्शन इमारत गिर पड़ी थी, जिसमें 17 लोगों की मौत और 5 गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। जख्मी लोगों का इलाज राजावाड़ी और शांति निकेतन अस्पताल में चल रहा है।


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