घाटकोपर हादसे में बेघर हो चुके लोगों की व्यथा, 'अब जाएं तो कहां जाएं हम'

 Ghatkopar
घाटकोपर हादसे में बेघर हो चुके लोगों की व्यथा, 'अब जाएं तो कहां जाएं हम'
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घाटकोपर में साईं दर्शन इमारत को गिरे तीन दिन हो गए. बिल्डिंग का मलबा साफ कर दिया गया है। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। इस दुर्घटना में कई परिवार बिखर गया। कई लोग बेसमय काल के गाल में समा गए।

इन्ही में से एक हैं गीता रामचंदानी। गीता बिल्डिंग के चौथे फ्लोर पर रहती थी। गीता भी इस हादसे में जख्मी हुई है। गीता का इलाज इस समय राजावाड़ी अस्पताल में चल रहा है, लेकिन गीता अब बेघर हो चुकी है। इस हादसे में गीता का घर मलबे में तब्दील हो गया। गीता के पति लालचंद रामचंदानी वाशी में गीता के बहन के साथ रहते हैं।

हालांकि इस हादसे में घायल लोगों को 2 लाख रुपए और मृत लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपए देने का वादा महाराष्ट्र सरकार ने किया है। लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें उनका घर चाहिए नाकि पैसे, और इन पैसो से घर तो मिलने से रहा।

गीता रामचंदानी के बेटे मनीष रामचंदानी कहते हैं सरकार को हमारे रहने के लिए घर की व्यवस्था करनी चाहिए। बेघर लोग अब कहां रहेंगे। कई लोग तो अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं।

इनके हरे जख्मों पर कुछ मलहम लगाने काम राजवाड़ी अस्पताल कर रहा है। राजावाड़ी अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. विद्या ठाकुर का कहना है कि इस दुर्घटना में घायलों का अस्पताल की तरफ से मुफ्त में इलाज किया जा रहा है।


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