
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई में गैर-कानूनी फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर राज्य सरकार और मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की तरफ से की जा रही कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।(High Court Questions Action Against Illegal Hawkers)
एडमिनिस्ट्रेशन में कोर्ट के पुराने ऑर्डर लागू करने की कोई 'इच्छा' नहीं
हाई कोर्ट ने कहा है कि फेरीवालों के खिलाफ यह कार्रवाई सिर्फ 'धूल झाड़ने' जैसी है और एडमिनिस्ट्रेशन में कोर्ट के पुराने ऑर्डर लागू करने की कोई 'इच्छा' नहीं है।जस्टिस अजय गडकरी और कमल खता की बेंच ने मुंबई में गैर-कानूनी फेरीवालों से जुड़ी अलग-अलग पिटीशन पर सुनवाई करते हुए यह नाराजगी जताई।जब भी हम कुछ पूछते हैं, तो आप सिर्फ पुराने ऑर्डर पढ़कर सुनाते हैं। अब आप हमें ऑर्डर पढ़कर मत सुनाइए, बल्कि यह बताइए कि आप इसे लागू करने जा रहे हैं या नहीं, हाई कोर्ट ने एडमिनिस्ट्रेशन से कहा।
कोर्ट ने लगाई फटकार
राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील अंजलि हेलेकर ने कहा कि गैर-कानूनी फेरीवालों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है, बल्कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के पास है।हालांकि, बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया और साफ किया कि अगर सरकार को लगता है कि राज्य के पास अधिकार नहीं है, तो उसे साफ-साफ बताना चाहिए।
इसी वजह से बॉम्बे हाई कोर्ट ने गैर-कानूनी फेरीवालों के मुद्दे पर राज्य सरकार और नगर निगम को कड़ा संदेश दिया है।
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