धर्म, खानपान और मकान

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मुंबई में नॉन वेज खाने वालो को घर देने से मना करने पर अब भारी पड़ सकता है। घर देने से मना करने पर अब कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बीएमसी के सुधार समिति में इस बाबत एक प्रस्ताव पेश किया गया था जसी पर चर्चा करते हुए नगरसेवकों ने कड़े कानून की मांग की।

मुंबई में धर्म और खानपान को लेकर घर न देने की कई घटनाये सामने आ चुकी हैं, इसे देखते हुए बीएमसी के सुधार समिति में एक प्रस्ताव पेश हुआ जिसके अनुसार अगर कोई बिल्डर धर्म या खानपान को लेकर किसी को घर देने से मना करता है तो उसका पानी कनेक्शन, एनओसी, जैसी सुविधाएं रद्द कर देनी चाहिए।

इस बारे में मनपा ने सदस्यों को बताया कि अगर कोई प्राइवेट बिल्डर धर्म या खानपान के कारणों से घर देने में मना करता है तो विकास नियंत्रण नियमावली 1991 एमआरटीपी 1966 और महापालिका अधिनियम 1888 के तहत जांच की जा सकती है।

मनपा ने आगे बताया कि यह विषय नागरिक व्यवस्था होने के कारण महाराष्ट्र शासन से संबंधित विभाग के साथ पुलिस विभाग को भी कार्रवाई करना चाहिए, लेकिन यह मुद्दा मनपा के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है इसीलिए पीड़ित को इस मामले में पुलिस से सहायता लेनी चाहिए।

लेकिन मनपा के इस जवाब का कांग्रेस के अशरफ आजमी, शिवसेना की श्रद्धा जाधव और किशोरी पेडणेकर सहित अन्य नगरसेवकों ने विरोध जताया और कानून में सुधार करने की बात कही। विरोध को देखते हुए सुधर समिति के अध्यक्ष बाला नर ने इस प्रस्ताव को फिर से प्रशासन के पास भेज दिया।

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