सरकार और पिछड़ा आयोग के बीच अटका मराठा आरक्षण मुद्दा

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 सरकार और पिछड़ा आयोग के बीच अटका मराठा आरक्षण मुद्दा
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मराठा आरक्षण मुद्दा अब पिछड़ा आयोग के पास जा सकता है। इस विषय पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाथ झटकते हुए कहा कि मराठा आरक्षण यह विषय पिछड़ा आयोग के पास भेजना है या नहीं इस पर फैलसा लेने का अधिकार राज्य सरकार को है उनको यह निर्णय लेना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के निर्णय के विरोध में या आयोग के निर्णय के बाद याचिकाकर्ता फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को पहले ही सूचना दे दी थी कि अगर पिछड़ा आयोग के पास मराठा आरक्षण का मुद्दा जाता है तो उससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गुरूवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश देते हुए कहा कि इस मामले में वह अपनी भूमिका स्पष्ट करें। मराठा आरक्षण मुद्दा पिछड़ा आयोग के पास जाना चाहिए या फिर राज्य सरकार के पास यह एक प्रमुख मुद्दा है। इसके लिए हाईकोर्ट ने याचिकर्ता को हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है।

पिछड़ा आयोग योजना के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संभाजीराव म्हसे ने मराठा आरक्षण आन्दोलन को समर्थन दिया था इसीलिए सेव डेमोक्रेसी (पुणे) और कुनबी समजान्नोती संघ (मुंबई) मराठा आरक्षण को पिछड़ा आयोग के पास भेजने का विरोध कर रहा है।
जबकि इस बारे में याचिकाकर्ता विनोद पाटिल के अनुसार नारायण राणे समिति ने सभी बिंदुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट में मराठा आरक्षण को जायज बताया था। इसीलिए मराठा आरक्षण मुद्दा समिति के पास न भेजते हुए इस पर हाई कोर्ट को अपना फैसला सुनाया जाना चाहिए।


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