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धारा 498अ यानी दहेज़ कानून के दुरूपयोग होने के कारण कई परिवार इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। इसीलिए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर इस मामले में सरकार और कोर्ट को विचार करने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ता का नाम योगेश भालेराव है। इस मामले की सुनवाई 16 अगस्त को होनी है।


क्या था मामला?
आपको बता दें कि महिलाओं को बचाने के लिए 1983 में भारतीय दंड संहिता में धारा 498 अ को जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य दहेज जैसी सामाजिक बुराई एवं ससुराल में होने वाले अत्याचारों से महिलाओं को संरक्षण देना था। लेकिन कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें यह माना गया कि इस धारा का महिला पक्ष द्वारा दुरुपयोग हुआ है। यह कानून आपराधिक है परन्तु इसका स्वरूप पारिवारिक है। इसी को आधार बना कर सामाजिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता योगेश भालेराव की तरफ से के वकील एडवोकेट नितिन सातपुते ने यह याचिका दाखिल की है।

एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति आर. एम. सावंत और रेवती मोहिते-ढेरे की खंडपीठ ने की जिस पर हमारी तरफ से पक्ष रख गया अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 अगस्त को होनी है।

इस याचिका के मुताबिक फैमिली वेलफेयर कमिटी सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बताये गए दिशा निर्देशों पर काम नहीं कर रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि इस समिति को मार्गदर्शक सिद्धांत के अनुसार काम करना चाहिए। आरोपी और शिकायतकर्ता के जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग कमिटी करे और अब तक दाखिल सभी शिकायतों की पुनः जांच हो।


याचिका में आगे कहा गया है कि 40 फीसदी तक दिव्यांग लोगो की सुनवाई किसी भी कोर्ट में हो, अगर झूठे केस दाखिल होते हैं तो उन पर कार्रवाई हो साथ ही उनसे मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपए भी वसूले जाएं।  

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