कागजों की कीमत बढ़ने से प्रिंटिंग व्यवसाय को खतरा

 Nariman Point
कागजों की कीमत बढ़ने से प्रिंटिंग व्यवसाय को खतरा

देश के सबसे पुराने उद्योग में से एक प्रिंटिंग और पैकेजिंग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कागजों के दामों में 15 फीसदी की वृद्धि होने पर करीब ढाई लाख प्रिंटर्स व्यावसाय बंद होने की कगार पर हैं या फिर बेरोजगारी के मुहाने पर खड़े हो गये हैं।

बॉम्बे मास्टर्स प्रिंटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मेहुल देसाई ने कहा कि पिछले 2 महीने से कागज़ के दामों में 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। बढ़ते भाव के कारण हमने भी 15 फीसदी अधिक दाम बढ़ाने की निर्णय लिया है। हमें समर्थन दीजिये और बंद होते उद्योग की सहायता कीजिये। अपने तमाम मांगों को लेकर नेशनल और लोकल एसोसिएशन ऑफ़ प्रिंटर्स ने गुरूवार को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था, जहां उन्होंने उक्त बातें कही।

देसाई ने आगे कहा कि यूएसए, चीन और यूरोप में पेपर मशीनरी जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी आने से किराये में वृद्धि, कागजों की दरों में वृद्धि, ओवरहेड कास्ट और मजदूरी में वृद्धि जैसी कई समस्याओं ने जन्म लिया।

मुंबई मुद्रक संघ के अध्यक्ष तुषार धोटे ने कहा कि इस समय करीब ढाई लाख प्रिंटर्स और उन पर निर्भर साढ़े चार लाख लोग और उनके परिवारों के हितों के लिए प्रिंटिंग क्षेत्र में लागत की दर को बढ़ाना आवश्यक है। साथ ही लोगों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण भी देना जरुरी है।

धोटे ने कहा कि इस उद्योग को बचाने के लिए हमारे ग्राहक बैंक, फार्मा कंपनी, एजीएफसी, समाचार पत्र, प्रकाशन हाऊस, को भी हमें समर्थन देना होगा। अगर जरुरी होगा तो हम आन्दोलन भी करेंगे।

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