बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला, अच्छी सड़क और फुटपाथ नागरिको का मौलिक अधिकार

कोर्ट ने कहा की कोई भी तब तक स्मार्ट नहीं बन सकता जब तक उसकी सड़के अच्छी ना हो

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मुंबई उच्च न्यायालय ने गुरवार को एक केस में फैसला सुनाते हुए कहा की शहर में अच्छी सड़के और अच्छे फुटपाथ होना नागरिको का मौलिक अधिकार है। न्यायमूर्ति अभय ओक और न्यायमूर्ति रियाज छागला की एक खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा की शहर के नागरिको के लिए सरकार को अच्छी सड़को और फुटपाथ की व्यवस्था करनी चाहिये।


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कोई भी शहर बिना अच्छी सड़को के स्मार्ट शहर नहीं बन सकता

कोर्ट ने कहा की "हम हर शहर को स्मार्ट बनाने के लिए सरकार के प्रयास से अवगत हैं हालांकि, कोई भी शहर स्मार्ट शहर तब तक नहीं बन सकता, जब तक उस शहर की सड़के और फुटपाथ की स्थिती अच्छी ना हो। " नागरिकों के लिए सड़क और फुटपाथों अच्छी स्थिति में होना मौलिक अधिकार है और तदनुसार यह उन लोगों को प्रदान करने के लिए स्थानीय अधिकारियों का दायित्व है।


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माहाराष्ट्र सरकार को दिया आदेश

न्यायाधीशों ने खुले मेंहोल में गिरने के बाद डॉ. दीपक अमरापुरकर की सितंबर 2017 की मौत का हवाला दिया। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एक केंद्रीयकृत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और एक अच्छी गुणवत्ता की सड़कों का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए एक फ्रेम तैयार करने का निर्देश दिया।

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