RTI के दायरे में आएगा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चर्चा किया

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सुप्रीम कोर्ट  ने आज एक बार फिर ऐतिहासिक फैसला लिया। CJI के कार्यालय के RTI के दायरे में आने या बाहर रखने संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया की   CJI कका कार्यालय के RTI के दायरे में आएगा।   सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चर्चा किया  जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि देश के सबसे शीर्ष न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को भी सूचना के अधिकार के दायरे में आना चाहिये। जिससे पारदर्शिता बरकरार रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कई तरह के नियम भी बनाए है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा की  कि CJI ऑफिस एक पब्लिक अथॉरिटी है, इसके तहत ये RTI के तहत आएगा। सुप्रीम कोर्ट में हुई  महत्वपूर्ण सुनवाई में सीजेआई के अलावा न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भी शांमिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय पर फैसला को अप्रेल को ही सुरक्षित कर लिया था। 

क्या था दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

मालूम हो कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 10 जनवरी 2010 को यह निर्णय सुनाया था जिसके बाद से ही देश भर में न्यायालय को भी RTI के अधीन लाने की मांग जोर पकड़ने लगी। हालांकि न्यायालय से जुड़े एक धड़ा का मानना है कि पारदर्शिता के नाम पर न्यायपालिका के अधिकार को खतरा पहुंच सकता है। लिहाजा इसे के दायरे से बाहर रखना चाहिये।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कोलेजियम के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाला जाएगा। फैसला पढ़ते हुए जस्टिस रम्मना ने कहा कि RTI का इस्तेमाल जासूसी के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है।

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